‘बीजेपी आग से खेल रही..,’ परिसीमन के खिलाफ CM MK Stalin ने फूंक दिया बिगुल, क्या तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है असर?

CM MK Stalin ने तमिलनाडु में चुनावी तैयारियों के बीच परिसीमन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है?

CM MK Stalin

Picture Credit: गूगल (सीएम एमके स्टालिन)

CM MK Stalin: राजधानी दिल्ली से लेकर चेन्नई तक गहमा-गहमी का दौर जारी है। दरअसल, आज संसद के विशेष सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किया जाना है। इसके तहत देश में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 850 करने का प्रावधान है। इसको लेकर दक्षिण भारत में सियासी घमासान जोरों पर है। चुनावी राज्य तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने मोर्चा संभाल लिया है।

सीएम एमके स्टालिन मुखरता से परिसीमन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने आज राज्यभर के लोगों से काला झंडा दिखाने की अपील की है। एक ओर तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। दूसरी ओर परिसीमन को लेकर छिड़ा संग्राम सूबे का सियासी समीकरण बदल रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्तमान रुख का असर तमिलनाडु चुनाव 2026 पर पड़ सकता है? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।

परिसीमन के खिलाफ CM MK Stalin ने फूंक दिया बिगुल!

संसद के विशेष सत्र को लेकर मची गहमा-गहमी के बीच सीएम एमके स्टालिन ने बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार को लगभग चेतावनी देते हुए कहा है कि बीजेपी आग से खेल रही है। यदि तमिलनाडु की आवाज को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो इसका परिणाम बहुत बुरा होगा। सीएम एमके स्टालिन ने आज लोगों से परिसीमन विधेयक को काले झंडे दिखाने की अपील की है। उन्होंने विधेयक की कॉपी भी जलाई है।

सीएम एमके स्टालिन ने डीएमके सांसदों और जिला सचिवों के साथ आपात बैठक कर रणनीति भी तय की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि जो तलवार हमारे सिर पर लटक रही थी, वह अब हमारे ऊपर गिर चुकी है।’ इसका आशय है कि सरकार परिसीमन कर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ा रही है। सीएम एमके स्टालिन समेत तमाम नेताओं का मानना है कि इससे भारत की राजनीति में दक्षिण भारत का प्रभुत्व प्रभावित होगा। इसी को लेकर मुखरता के साथ विरोध किया जा रहा है।

क्या तमिलनाडु विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है असर?

चुनावी समीकरण क्षण भर में बदल जाते हैं। अतीत के पन्ने पलटने पर इसके सैकड़ों उदाहरण देखने को मिलेंगे। जिस तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल तो मतदान होना है। वहां सीएम एमके स्टालिन के नेतृत्व में सत्तारुढ़ दल डीएमके परिसीमन के खिलाफ मोर्चा खोल रही है। राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में लगता है कि चुनावी तैयारियों को छोड़ डीएमके अलग रणनीति अपना रही है।

इसक असर विधानसभा चुनाव के लिए जारी प्रचार-प्रसार पर पड़ता नजर आ रहा है। डीएमके नेता कार्यकर्ताओं या जनता से संवाद न करते हुए परिसीमन के खिलाफ बिगुल फूंकने की तैयारी में हैं। विधानसभा चुनाव पर इसका कितना असर पड़ेगा ये तो 4 मई को नतीजों की घोषणा के साथ स्पष्ट होगा। हां, ये जरूर है कि परिसीमन का मुद्दा तमिलनाडु की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या नतीजा सामने आता है।

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