OSM विवाद के बीच फीस को लेकर Rahul Gandhi का तंज, कहा ‘गलती CBSE की और सजा बच्चे को…’

कांग्रेस नेता ने सीबीएसई की तरफ से कॉपी रिचेकिंग के लिए फीस को लेकर निशाना साधा है और इस दौरान सवाल उठाए हैं। आइए जानते हैं किस तरह से उन्होंने तंज किया है जो चर्चा में है।

Rahul Gandhi

Photo Credit- Google Rahul Gandhi

Rahul Gandhi: बोर्ड की परीक्षा में उत्तर पुस्तिका की जांच करने के लिए इस बार सीबीएसई की तरफ से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को जारी किया गया। वहीं इसे लेकर देश भर में विवाद जारी है जहां कहा जा रहा है कि सीबीएसई की तरफ से इसे जल्दबाजी में जारी किया गया। इसकी वजह से छात्रों के परिणाम में काफी हद तक फेरबदल देखी गई है इसलिए लगातार विरोधों का सामना करना पड़ रहा है और कॉपी चेकिंग के लिए छात्रों को पैसे भरने पड़ रहे हैं। वहीं इसे लेकर अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी मुखर हुए हैं और सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी भड़ास निकाली है। केंद्र सरकार के साथ-साथ सीबीएसई पर सवाल खड़े किए हैं।

Rahul Gandhi ने बताया कॉपी का गलत तरीके से जांच क्यों है धोखा

राहुल गांंधी ने x प्लेटफार्म पर लिखा, “सीबीएसई के मई 2025 के टेंडर में यह शर्त थी कि आंसर शीट को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से स्कैन किया जाएगा, उनकी बाइंडिंग (spines) सुरक्षित रखी जाएगी, और कम से कम 300 DPI रिज़ॉल्यूशन पर स्कैन किया जाएगा। अगस्त में दोबारा जारी किए गए टेंडर में चुपके से ये सारी शर्तें हटा दी गईं। स्कैनर शब्द को सामान्य बना दिया गया। रिज़ॉल्यूशन घटाकर 200 DPI कर दिया गया। अब हमें पता चला है कि असल में इसका क्या मतलब था। यह खुलासा हुआ है कि COEMPT ने आंसर शीट को मोबाइल फ़ोन से स्कैन किया था।”

राहुल गांंधी ने केंद्र सरकार पर किया ये सवाल

इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि “धुंधली कॉपियां, गायब पन्ने, बिना स्कैन हुई किताबें—ये कोई गलतियां नहीं हैं। ये उस कॉन्ट्रैक्ट का पहले से तय नतीजा हैं, जिसे किसी खास वेंडर को फ़ायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था। यह एक धोखा है। और हर वह बच्चा जिसके नंबर गलत तरीके से जांचे गए हैं वह इस धोखे का शिकार है। आज सुबह, प्रधानमंत्री के पास आमों के बारे में बात करने का समय था। लेकिन उनके पास उन 18.5 लाख बच्चों के बारे में बात करने का समय नहीं था, जिनकी आंसर शीट फ़ोन से स्कैन की गई थीं। धर्मेंद्र प्रधान जी अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। मोदी जी की चुप्पी अब सिर्फ़ उदासीनता नहीं रही। यह इस अपराध में उनकी मिलीभगत का सबूत है।”

जानिए कांग्रेस नेता ने कॉपी चेकिंग के लिए फीस पर क्यों किया तंज

इसके साथ ही एक और पोस्ट में राहुल गांंधी ने कहा कि “जेबकतरों से सावधान रहें—आज वे सीबीएसई के अंदर ही बैठे हैं। अगर CBSE की गलती की वजह से आपके नंबर गलत आते हैं, तो आपको क्या मिलता है? एक बिल: डिजिटल स्कैन कॉपी: ₹100/विषय, री-टोटलिंग (नंबरों की दोबारा गिनती): ₹100/पेपर, री-इवैल्यूएशन (दोबारा मूल्यांकन): ₹25/प्रश्न। एक बच्चे को अपनी आंसर शीट ठीक से चेक करवाने के लिए ही ₹2000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। ज़रा सोचिए: जब 4 लाख बच्चों ने इस तरह के आवेदन किए हैं, तो CBSE कितनी कमाई कर रहा होगा।

राहुल गांंधी ने शिक्षा को क्यों कहा धंधा

राहुल गांंधी ने आगे लिखा, “जब स्कैनिंग फ़ोन से की गई हो, तो गलत मार्किंग होना तय है। और इसे ठीक करवाने का खर्च बच्चा उठा रहा है। गलती सीबीएसई की है। सज़ा बच्चे को मिल रही है। और कमाई सरकार की हो रही है। जब शिक्षा को एक सेवा से बदलकर एक धंधा बना दिया जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं। बल्कि वे और बढ़ जाती हैं। और हमारे बच्चे इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं—अपने समय, अपने आत्मविश्वास और अपने भविष्य के रूप में।”

बता दें कि सीबीएसई की तरफ से डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए 100 रुपये प्रति विषय, री-टोटलिंग के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए 25 रुपये प्रति प्रश्न छात्रों को देने पर रहे हैं।

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