जेन-जी ने CBSE के उड़ाए होश, ओएसएम सिस्टम को लेकर Sarthak Sidhant के खुलासे से मचा हड़कंप, जानें क्या है पूरा माजरा?

Sarthak Sidhant: जेन-जी और सीबीएसई को लेकर नया विवाद चर्चा में है। सार्थक सिद्दांत ने ओएसएम सिस्टम पर बड़ा खुलासा किया है।

Sarthak Sidhant

फाइल फोटो

Sarthak Sidhant: सीबीएसई केओएसएम सिस्टम में लगातार मिल रही गड़बड़ी के कारण लाखों छात्र नाखुश है। इसी बीच अब झारखंड के Sarthak Sidhant ने एक ऐसा खुलासा किया, जिसने सरकार की नींद उड़ गई है। बता दें कि दरअसल सार्थक ने संसदीय समिति के सामने सात पेज का एर प्रजेंटेंशन पेश किया था।

इसमें ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स (कंपनियों) का चयन करने की टेंडर प्रक्रिया में खामिकों को दिखाते हुए बोर्ड के सामने कई सवाल भी खड़े किए थे। यही कारण है कि सरकार की तरफ से तुरंत फैसला लेते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु पद से हटा दिया गया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी सार्थक से मुलाकात की थी।

ओएसएम सिस्टम को लेकर Sarthak Sidhant के खुलासे से मचा हड़कंप

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक 30 मई को Sarthak Sidhant ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि “मैंने CBSE के टेंडर दस्तावेजों की तुलना करते हुए एक ब्लॉग लिखा है। मैंने इसे अपलोड और प्रकाशित कर दिया है। मेरे ब्लॉग के अनुसार, इसमें कम से कम 15 विसंगतियाँ थीं। मैं उनमें से तीन-चार पर प्रकाश डालना चाहूँगा। सबसे पहले, मैं आपको Coempt के बारे में कुछ जानकारी देना चाहता हूँ। इसे पहले Globarena के नाम से जाना जाता था, और इसका इतिहास बहुत ही संदिग्ध है। Coempt के कारण 23 छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी।

अब, मैं आपको RFP (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) के बारे में बताना चाहता हूँ। इसमें होता यह है कि सरकार एक टेंडर जारी करती है और बोली लगाने वालों से इसके लिए बोली लगाने को कहती है। CBSE ने यह टेंडर तीन बार जारी किया। मैंने पुराने RFP और नए RFP की तुलना की है, और मुझे कुछ विसंगतियाँ मिली हैं। पहली विसंगति यह है कि खराब प्रदर्शन से संबंधित तीन खंड थे जिन्हें नए RFP से पूरी तरह हटा दिया गया है।

पहले वाले RFP में, ‘पहले ब्लैकलिस्टेड’ का एक खंड था, जबकि नए RFP में इसे ‘वर्तमान में ब्लैकलिस्टेड’ में बदल दिया गया है। बोर्ड ऐसे सेवा प्रदाता को क्यों चाहेगा जो पहले ब्लैकलिस्टेड था? तीसरी बात जो मुझे पता चली, वह है 50 करोड़ की सीमा, जिसके तहत पात्रता हासिल करनी थी, और कोएम्प्ट ने इसे 1.7% से पूरा किया।

भ्रष्टाचार के मामलों की समय सीमा आधी कर दी गई, और परियोजना मानदंडों में बदलाव किए गए। इससे एक पैटर्न दिखता है कि उद्योग की दिग्गज कंपनी टीसीएस को प्राथमिकता नहीं दी गई, बल्कि कोएम्प्ट को प्राथमिकता दी गई, जो संस्थानों के एक बहुत ही खंडित समूह के रूप में काम करती है”।

कौन है 18 वर्षीय Sarthak Sidhant?

जानकारी के मुताबिक Sarthak Sidhant रांची का रहने वला है। बता दें कि सार्थक ने भी इसी साल 12वीं की परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया तो सार्थक सिद्धांत ने नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाए और अपनी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए अपनी स्कैन आंसर शीट मांगी थी। जब उन्हें आंसर शीट मिली तो उन्हें कुछ शक हुआ।

जिसके बाद उन्होंने जांच पड़ताल शुरू की और इससे जुड़ी जानकारी अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। माना जा रहा कि सार्थक के प्रजेंटेंशन की ही नतीजा है कि केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है।

 

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