एंटी-इनकंबेंसी से लेकर तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप! जानें Mamata Banerjee की बंगाल चुनाव में हार के 5 प्रमुख कारण

बंगाल विधानसभा चुनाव में Mamata Banerjee को करारी हार मिली है। बीजेपी ने बंगाल की 294 में से 206 सीटें जीत कर ममता बनर्जी का विजय रथ रोक दिया है। टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। खुद ममता बनर्जी तक अपनी सीट भवानीपुर से चुनाव हार गई हैं।

Mamata Banerjee

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Mamata Banerjee: तमाम एग्जिट पोल सही साबित हुए और बंगाल में बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल कर इतिहास रचा है। जैसे कभी वाम दलों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 2011 में बंपर बहुमत के साथ ममता बनर्जी की टीएमसी सत्ता में आई थी। वैसे ही बीजेपी ने टीएमसी को भारी अंतर से हराते हुए पश्चिम बंगाल की जनता का विश्वास जीता है।

विश्लेषक अब अपने-अपने विवेकानुसार ममता बनर्जी की हार और बीजेपी की जीत की समीक्षा कर रहे हैं। तमाम ऐसे कारण गिनाए जा रहे हैं जिनकी वजह से ममता बनर्जी चुनाव हारी हैं। आइए हम भी आपको 5 ऐसे कारण बताते हैं जो ममता बनर्जी की टीएमसी के हार के संभावित वजह हो सकते हैं।

बंगाल चुनाव में Mamata Banerjee की हार के 5 प्रमुख कारण

वो हार कितनी बुरी होगी जिसमें पार्टी का मुखिया चुनावी मैदान में परास्त हो। यहां बात ममता बनर्जी की हो रही है जो भवानीपुर सीट नही बचा सकीं। उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने बड़े अंतर से चुनाव हराया है। टीएमसी के तमाम दिग्गज नेता बंगाल चुनाव में परास्त रहे। इतनी बड़ी हार के कई कारण हैं।

सबसे पहले बात एंटी-इनकंबेंसी की। इसे ममता बनर्जी की हार का प्रमुख कारण माना जा रहा है। ममता बनर्जी की टीएमसी 2011 से 2026 यानी 15 वर्ष बंगाल की सत्ता में रही है। इतने बड़े कार्यकाल के बाद अंदरखाने लोगों के बीच सत्तारुढ़ दल के खिलाफ असंतोष बढ़ना स्वभाविक है। यही वजह है कि लोगों ने सत्ता परिवर्तन को चुना है।

दूसरी वजह महिला सुरक्षा मानी जा रही है। अगस्त 2024 में आरजीकर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और फरवरी 2024 में संदेशखाली में टीएमसी नेताओं पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप। इन दोनों प्रकरण ने आधी आबादी को प्रभावित किया और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। ये वजह भी ममता बनर्जी के लिए चुनौती बनी।

तीसरी वजह बंगाल में कथित रूप से भ्रष्टाचार की मजबूत जड़ों को माना जा रहा है। अभिषेक बनर्जी समेत कई टीएमसी नेताओं पर बीजेपी ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। ममता बनर्जी की हार की नींव यहां से भी मजबूत हुई। हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण ममता बनर्जी की हार की चौथी वजह मानी जा रही है।

बीजेपी ने मुस्लिम मतदाताओं को किनारे कर हिंदुओं को एकजुट करने का काम किया। इसका असर देखने को मिला और बंगाली हिंदू के साथ गैर-बंगाली हिंदू भी एकतरफा बीजेपी के साथ नजर आए। एसआईआर प्रक्रिया से भी ममता बनर्जी को नुकसान पहुंचा। बड़ी संख्या में उन मतदाताओं के नाम कटे जो परंपरागत रूप से ममता बनर्जी के वोटर रहे हैं।

टीएमसी के गढ़ भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार

यूं तो टीएमसी के कई दिग्गज बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बुरी तरह हारे हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा भवानीपुर की है जहां से खुद ममता बनर्जी चुनाव हारी हैं। भवानीपुर टीएमसी का गढ़ रहा है और यहां काफी समय से टीएमसी की जीत होती रही है। 2021 में ममता बनर्जी ने भवानीपुर छोड़ नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था जहां उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने हराया था।

इस विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी धुरंधर साबित हुए हैं और ममता बनर्जी को भवानीपुर से हराया है। शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी आगे थीं, लेकिन अंतत: शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी बढ़त हासिल करते हुए 15105 वोटों से भवानीपुर सीट जीत ली है। ममता बनर्जी की टीएमसी का गढ़ रहा भवानीपुर को भी बीजेपी ने भेद लिया है। बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की करारी हार और बीजेपी का 294 में 206 सीटें जीतना खबरों में है।

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