MK Stalin: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। इसी बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK Stalin ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है। दरअसल मुख्यमंत्री का आरोप है कि केंद्र सरकार परिसीमन योजना लेकर आने वाली है। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि अगर इस योजना के दक्षिण राज्यों में नुकसान होता है तो राज्य की जनता चुप नहीं रहेगी और एक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
मालूम हो कि 16-18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। जिसमे महिला बिल के अलावा अन्य विधेयक भी पेश हो सकते है, जिसमे परिसीमन योजना शामिल है। आईए समझते है कि आखिर विपक्ष क्यों इसका विरोध कर रही है।
MK Stalin ने मोदी सरकार पर कसा तंज!
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK Stalin ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि “वेल्लोर की धरती, जहाँ भारतीय स्वतंत्रता की पहली क्रांति भड़की थी, आज दिल्ली के प्रभुत्व के विरुद्ध न्याय की पुकार लगाएगी! वे परिसीमन लाकर तमिलों को उनकी ही भूमि में द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाना चाहते हैं।
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🛑 தமிழர்களைச் சொந்த நாட்டில் இரண்டாம்தரக் குடிமக்களாக்க #Delimitation கொண்டு வருகிறார்கள்.
🛑 இதனை எதிர்ப்பதால், தமிழர்களைப் படிப்பறிவற்றவர்கள் என்கிறார் “பா.ஜ.க.… pic.twitter.com/rkFFzXGUO1
— M.K.Stalin – தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விடமாட்டேன் (@mkstalin) April 14, 2026
इसका विरोध करने पर, “भाजपा के पाखंडी” माननीय पीयूष गोयल तमिलों को अनपढ़ कहते हैं। उन्हें शिष्टाचार का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है। अन्यथा, तमिलनाडु उन्हें करारा जवाब देने में और भी दृढ़ हो जाएगा। ऐसे लोगों को दिया गया हर वोट तमिलनाडु को एक सदी पीछे धकेलने के बराबर है। फासीवादी भाजपा की छाया भी तमिलनाडु पर नहीं पड़ेगी यह स्टालिन द्वारा दी गई ढाल है”।
क्या है केंद्र सरकार की परिसीमन योजना?
परिसीमन का मतलब है लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना। यह प्रक्रिया देश की जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत में परिसीमन का काम Delimitation Commission द्वारा किया जाता है।
यह एक स्वतंत्र निकाय होता है, जिसकी सिफारिशें अंतिम मानी जाती हैं और इन्हें अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिलाओं को आरक्षण के बाद लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 850 करने को लेकर विधेयक पारित किया जा सकता है। इसके अलावा कई अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध जताया है। हालांकि देखना होगा कि विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार कौन से विधेयक पेश करेगी।
