Bengal Assembly Election 2026: मतगणना की तिथि नजदीक आने के साथ ही सूबे का सियासी समीकरण बदलता नजर आ रहा है। यहीं पीएम मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, शुभेंदु अधिकारी की हुंकार चल रही है। तो कहीं ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी जैसे टीएमसी नेता भी सत्ता वापसी की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
इसी बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने बीजेपी का साथ छोड़ ममता बनर्जी की टीएमसी का दामन थाम लिया है। हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवसैसी जैसे नेता भी बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को दिलचस्प बना रहे हैं। ऐसे में आइए हम आपको हालिया चुनावी समीकरण के बारे में बताने की कोशिश करते हैं।
SIR पर गहमा-गहमी के बीच BJP छोड़ CM ममता के साथ आए चंद्र कुमार बोस!
बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर गहमा-गहमी का दौर जारी है। ममता बनर्जी इसे चुनाव आयोग की साजिश बताते हुए केन्द्र को भी निशाने पर ले रही है। दूसरी ओर बीजेपी ममता बनर्जी की घबराहट के रूप में इन विरोधों पर पलटवार कर रही है। इसी बीच कभी बंगाल में बीजेपी का चेहरा रहे चंद्र कुमार बोस ने फिर टीएमसी की सदस्यता ले ली है। चंद्र कुमार बोस, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र हैं।
वर्ष 2016 में उन्हें बीजेपी के टिकट पर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ उतारा गया था। चंद्र कुमार बोस को तब हार मिली थी, लेकिन उन्हें बीजेपी के चेहरे के तौर पर देखा गया था। हालांकि, अब उन्होंने ब्रात्य बसु और कीर्ति आजाद की उपस्थिति में टीएमसी का दामन थाम लिया है। इसका बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर असर होगा या नहीं, ये नतीजों की घोषणा के बाद पता चलेगा।
हुमायूं कबीर के साथ सांसद ओवैसी भी भर रहे हुंकार!
टीएमसी से बागी होकर अपनी पार्टी की गठन करने वाले हुमायूं कबीर भी बंगाल में हुंकार भर रहे हैं। बीजेपी के साथ कथित डील को लेकर लग रही आरोपों के बीच हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। उन्होंने वीडियो को एडिटेड बताते हुए इसे अपने खिलाफ षडयंत्र बताया है। हुमायूं कबीर लगातार मुर्शिदाबाद, मालदा, बीरभूम, नादिया समेत अन्य तमाम जनपदों का दौरा कर राज्य सरकार के खिलाफ हुंकार भर रहे हैं।
इसी फेहरिस्त में सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी हैं जो पहले हुमायूं कबीर के साथ थे। हालांकि, अब कथित डील से जुड़े आरोपों के बीच उन्होंने पल्ला झाड़ लिया है और अकेले बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मैदान में हैं। बंगाल का हालिया समीकरण बेहद दिलचस्प है। जहां ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में आने को आतुर हैं। वहीं बीजेपी भी राज्य में कमल खिलाना चाहती है। कांग्रेस और वाम दलों को अपनी साख हासिल करनी है। ऐसे में 4 मई को नतीजों की घोषणा देखना बेहद दिलचस्प होगा।
