Bengal Politics: बिहार से सटे बंगाल में भी बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज कर अपनी सरकार बना ली है। शुभेंदु अधिकारी के नए सीएम के रूप में शपथ लेने के साथ ही सरकार एक्शन मोड में है। इस बीच बंगाल की सियासत में उठा-पटक देखने को मिल रही है। 15 वर्षों तक बंगाल की सत्ता में रही टीएमसी में बगावत के सुर उठ रहे हैं।
टीएमसी के तमाम ऐसे नेता हैं जो बंगाल चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। टीएमसी में असंतोष स्पष्ट रूप से दिखा रहा है जिससे ममता बनर्जी की चुनौतियां बढ़ रही हैं। बागी नेताओं के रुख ने बंगाल पॉलिटिक्स का पारा बढ़ा दिया है और सबकी नजरें कोलकाता पर हैं।
बागी नेताओं के रुख से TMC में बड़े टूट की आशंका?
टीएमसी में अंदरखाने खलबली मची है और विशेषज्ञ बड़े टूट की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। इसके पीछे बागी नेताओं का रुख है जिसके माध्यम से पार्टी में अंदरखाने असंतोष के भाव सामने आए हैं। टीएमसी के प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष ने निलंबन के बाद इशारों-इशारों में आलाकमान को संदेश भेजा है। मालदा से आने वाले टीएमसी नेता ने कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने भी क्रिया-कलाप पर सवाल उठाए हैं।
हावड़ा की बगनान सीट से 4 बार के विधायक रहे अरुणावा सेन ने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि अगर वे मुख्यमंत्री होते तो ऐसी हार के बाद तुरंत इस्तीफा दे देते। टीएमसी सांसद और एक्टर देव ने भी पार्टी नेतृत्व पर झूठे वादे करने का आरोप लगाया है। पापिया घोष ने भी अभिषेक बनर्जी की आलोचना की है। इन तमाम नेताओं के रुख से टीएमसी में चुनावी हार के बाद बड़े टूट की आशंका व्यक्त की जा रही है।
पार्टी में उपजे असंतोष के बीच क्या करेंगी ममता बनर्जी?
टीएमसी को बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद तमाम नेताओं ने खुलकर असंतोष व्यक्त किया है। तमाम दिग्गज नेताओं ने चुप्पी भी साध रखी है। कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष के निलंबन के बाद कई नेताओं ने खुलकर आलाकमान की आलोचना की है। ऐसी स्थिति में सबकी नजरें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर टिकीं हैं।
अभिषेक बनर्जी को पूर्व सीएम ममता के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि आलोचकों के निशाने पर वे भी हैं। ममता बनर्जी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती अब कैडर को बचाने और पार्टी को फिर खड़ा करने की होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि वे आगे क्या रुख अपनाती हैं और बागी नेताओं के तल्ख रुख का क्या समाधान निकालती हैं।
