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Thalapathy Vijay: क्या Tamil Nadu के विजय बन सकते हैं Pawan Kalyan? दक्षिण की राजनीति में उभरते चेहरों के बीच क्या है समानता?

Thalapathy Vijay: दक्षिण भारत की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर हवा का रूख तेजी से बदलता नजर आ रहा है।

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By: Gaurav Dixit

Published: अक्टूबर 28, 2024 12:15 अपराह्न

Thalapathy Vijay
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Thalapathy Vijay: दक्षिण भारत की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर हवा का रूख तेजी से बदलता नजर आ रहा है। दरअसल तमिलनाडु (Tamil Nadu) राज्य की सियासत में दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार थालापति विजय (Thalapathy Vijay) ने ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) पार्टी के सहारे दस्तक दे दी है।

तमिलनाडु में थालापति विजय के दस्तक देने के साथ ही कई तरह की संभावनाओं से जुड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। पूछा जा रहा है कि क्या थालापति विजय, पवन कल्याण (Pawan Kalyan) जैसे सफल नेता बन सकते हैं? ऐसे में आइए हम आपको इस तरह की सभी संभावनाओं पर छिड़ी चर्चा के बारे में विस्तार से बताते हैं।

दक्षिण भारत की राजनीति में फिल्मी सितारे

दक्षिण भारत की राजनीति में फिल्मी सितारों के आने की एक लंबी श्रंखला रही है। पूर्व की बात करें तो एम. करुणानिधि, मशहूर अभिनेत्री जयललिता, एम. जी. रामचंद्रन, एंटी रामा राव, कमल हासन (Kamal Haasan), चिरंजीवी, रजनीकांत, पवन कल्याण (Pawan Kalyan) जैसे फिल्मी सितारे दक्षिण की सियासत में दस्तक दे चुके हैं।

एम. करुणानिधि, जयललिता, एम. जी. रामचंद्रन और एंटी रामा राव मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे तो वहीं चिरंजीवी, कमल हासन, रजनीकांत और विजयकांत जैसे कलाकारों को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी। यही वजह है कि थालापति विजय (Thalapathy Vijay) के सियासी दस्तक को लेकर कई तरह से सवाल उठ रहे हैं।

पवन कल्याण का सियासी सफर

वर्तमान की बात करें तो दक्षिण भारतीय फिल्मों में बतौर एक्टर अपनी भूमिका निभा चुके पवन कल्याण आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं। पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (JSP) के पास आंध्र प्रदेश में 21 विधायक और 2 लोकसभा सांसद भी हैं जो कि उनकी मजबूती दर्शाते हैं। हालांकि, पवन कल्याण का ये सियासी सफर इतना आसान नहीं रहा है।

पवन कल्याण ने अपने बड़े भाई चिरंजीवी के साथ मिलकर वर्ष 2008 में सियासत की शुरुआत की थी। इस दौरान वे चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी से जुड़े। हालाकि तमाम सियासी उठा-पटक के बाद वर्ष 2011 में प्रजा राज्यम पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया। इसके बाद चिरंजीवी राजनीति से दूर हुए और पवन कल्याण ने वर्ष 2014 में जन सेना पार्टी (JSP) बनाकर अपनी सक्रियता बढ़ाई।

पवन कल्याण वर्ष 2019 में अकेले चुनाव लड़े और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सबक लेते हुए वर्ष 2024 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और BJP के साथ गठबंधन किया और JSP के 21 विधायक और 2 सासंद चुनाव जीतने में सफल रहे। पवन कल्याण को इस प्रदर्शन का ईनाम भी मिला और आज वे आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं।

क्या Tamil Nadu के Thalapathy Vijay बन सकते हैं Pawan Kalyan?

तमिलनाडु की राजनीति में दस्तक दे चुके थालापति विजय (Thalapathy Vijay) को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। दरअसल दोनों के बीच कुछ अहम समानता है। दोनों (विजय और पवन कल्याण) का परिवार पहले ही सियासी पदार्पण कर असफल रह चुका है। ऐसे में अब पवन कल्याण की सफलता के बाद पूछा जा रहा है कि क्या थालापति, पवन कल्याण की तरह राजनीतिक सफलता हासिल कर पाएंगे?

बता दें कि थालापति विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर उनसे पहले ‘ऑल इंडिया थलपति विजय मक्कल इयक्कम’ नामक पार्टी बना चुके हैं। इस पार्टी के नामकरण को लेकर विजय और उनके पिता के बीच विवाद भी हो चुका है। विजय की ओर से मांग की गई थी कि उनके नाम का इस्तेमाल चुनाव संबंधी गतिविधियों में न किया जाए और उनके नाम पर भीड़ न जुटाई जाए।

विजय पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि “मेरे पिता की राजनीतिक पार्टी और मेरे बीच प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई संबंध नहीं है।” ऐसे में अपने पिता से विवाद को लेकर चर्चा में रहे विजय का सियासी सफर क्या आसान होगा?

दक्षिण भारत में अभी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सत्ता में है। वहीं ऑल इंडिया अन्‍ना द्रविड़ मुन्‍नेत्र कड़गम (AIADMK) और BJP समेत कुछ अन्य दल राज्य में विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। थालापति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) भी फिलहाल इसी भूमिका में रहेगी और वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उतरेगी।

पवन कल्याण (Pawan Kalyan) के सियासी सफर को देखते हुए कहें तो विजय और उनकी पार्टी के लिए अकेले ही तमिलनाडु में एक विकल्प के रूप से खड़ा होना थोड़ा कठिन लग रहा है। हालाकि पवन कल्याण की जन सेना पार्टी (JSP) के तर्ज पर यदि TVK भी AIADMK, BJP या अन्य किसी दल के साथ चुनावी मैदान में उतरे तो इससे सफर थोड़ा आसान हो सकता है।

हालांकि, थालापति की ओर से अभी पार्टी की रणनीति क्यो होगा इसको लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया है। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि होगा कि थालापति विजय किस रणनीति से सहारे दक्षिण भारत की सियासत को साधते हैं और क्या वे पवन कल्याण की तरह सफल हो पाते हैं या नहीं?

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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