टीएमसी में फूट के बीच Mamata Banerjee के नए प्लान से हड़कंप, इंडिया गठबंधन की बैठक में दीदी का दिखेगा दम, समझे इसके मायने

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में गरमाई के सियासत के बीच अब इसमे इंडिया गठबंधन की एंट्री होने जा रही है। जिससे बंगाल की सियासत गरमा सकती है।

Mamata Banerjee

फाइल फोटो

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में गरमाई सियासत के बीच अब इसमे इंडिया गठबंधन की एंट्री होने जा रही है। बता दें कि दिल्ली में 8 जून को होने वाली इंंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी हिस्सा लेने जा रही है। मालूम हो कि टीएमसी के करीब 60 विधायक पूरी तरह से बागी हो चुके है और ममता बनर्जी की जगह ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुना है।

वहीं अब खबर सामने आ रही है कि अब विधायकों के बाद सांसद भी बागी होने जा रहे है। माना जा रहा है कि करीब 20  से अधिक सांसद बागी हो सकतेे है। मालूम हो कि हाल ही में ममता Mamata Banerjee ने पार्टी नेता की बैठक बुलाई थी। जिसमे 8 विधायक और 6 सांसद पहुंचे थे। वहीं अब खबर सामने आ रही है दीदी  दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में अपनी पार्टी को लेकर चर्चा कर सकते है।

Mamata Banerjee के नए प्लान से हड़कंप

सूत्रों के अनुसार Mamata Banerjee विपक्षी एकता के मुद्दे को फिर से मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। इंडिया गठबंधन की बैठक में वह कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाकर विपक्ष के साझा एजेंडे को मजबूत करने का प्रयास कर सकती हैं। बताया जा रहा है कि उनका फोकस तीन प्रमुख बिंदुओं पर हो सकता है।

जिसमे – विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय, राज्यों के अधिकारों और संघीय ढांचे का मुद्दा, आगामी चुनावी रणनीति पर साझा रोडमैप।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन मुद्दों के जरिए ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता और प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास कर सकती हैं। वहीं खबर सामने आ रही है कि दीदी ने टीएमसी सांसद युसूफ पठान को अपनी सीट छोड़ने के लिए कही है, लेकन यूसुफ पठान ने मना कर दिया है।

इंडिया गठबंधन की बैठक क्यों है अहम?

इंडिया गठबंधन की बैठक ऐसे समय में होने जा रही है जब विपक्षी दलों के सामने एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। कई राज्यों में क्षेत्रीय दल अपने-अपने राजनीतिक हितों को लेकर अलग-अलग रणनीति अपना रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी का सक्रिय होना यह संकेत देता है कि विपक्ष के बड़े चेहरे अभी भी गठबंधन को प्रासंगिक बनाए रखने के पक्ष में हैं।

यदि बैठक में उनकी बातों को व्यापक समर्थन मिलता है तो विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। बता दें कि बैैठक में आगामी चुनावों पर सहमति बन सकती है। यह बैठक 8 जून को होने जा जा रही है। एक्सपर्ट का मानना है कि यदि ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने में सफल रहती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

 

 

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