PM Modi: दक्षिण भारत में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ता नजर आ रहा है। पीएम मोदी ने केरल और तमिलनाडु में चुनावी सभा को संबोधित कर शंखनाद कर दिया है। केरल और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां बीजेपी आज तक नहीं जीत सकी है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री दोनों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर हैं। पीएम मोदी का केरल और तमिलनाडु से शंखनाद करना कई सियासी संभावनाओं की ओर इशारा करता है।
ये एक तरह से एनडीए द्वारा खींची गई सियासी लकीर है जो दक्षिण में सियासी प्रभुत्व मजबूत करने की व्याकुलता को दर्शाती है। पीएम मोदी ने साफ तौर पर केरल में वामपंथी सरकार और तमिलनाडु की डीएमके सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीजेपी अपना अभेद किला जीत पाने में कामयाब होगी? एनडीए किस खास स्ट्रैटजी से तमिलनाडु और केरल का चुनाव लड़ेगा? तो आइए इन सवालों का जवाब ढूंढ़ने के साथ पीएम मोदी के केरल और तमिलनाडु दौरे की चर्चा करते हैं।
वामपंथ के साथ DMK को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए ये रणनीति अपनाएगा NDA
बीजेपी केरल और तमिलनाडु को जीतकर अपनी कसक पूरा करने को आतुर है। ये दोनों ऐसे राज्य हैं जहां आज तक केन्द्र की सत्तारुढ़ दल सरकार में नही रही है। ऐसे में अबकी बार पार्टी यहां राज्य सरकारों को निशाना बनाकर सत्ता में आने के लिए खास रणनीति अपना रही है। पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम पहुंचकर विकास को गति देते हुए अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई।
इसके साथ ही उन्होंने पीएम स्वनिधी क्रेडिट कार्ड लॉन्च करते हुए सीएसआईआर-एनआईआईएसटी इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप हब की आधारशिला भी रखी। प्रधानमंत्री की ये पहल दर्शाती है कि बीजेपी विकास के साथ केरल फतह करने की रणनीति अपना रही है। वही पीएम मोदी ने सीएम पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को भी निशाने पर लिया है। वहीं कांग्रेस को मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस बताकर प्रधानमंत्री ने हिंदू मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश की है।
तमिलनाडु में भी पीएम मोदी एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले सरकार पर जमकर बरसे हैं। उन्होंने सीएम स्टालिन पर परिवारवाद के साथ वोट बैंक की राजनीति के लिए न्यायपालिका का अपमान और तमिल संस्कृति को खतरे में डालने के आरोप लगाए हैं। पीएम मोदी ने पूर्व सीएम जे जयललिता की सराहना कर महिलाओं को साधने की कोशिश भी है। उनके साथ पूर्व सीएम पलानीस्वामी, एएमएमके चीफ टी टी वी दिनाकरन और पीएमके नेता अन्बुमनी रामदास की उपस्थिति एकजुटता का संदेश देती है।
इन सभी पहलुओं को साधते हुए बीजेपी अबकी बार 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में केरल से वाम दलों और तमिलनाडु से डीएमके गठबंधन का सत्ता से उखाड़ फेंकने की कोशिश करेगी। पीएम मोदी ने साफ तौर पर सियासी लकीर खींच दी है जिस पर आगे भी बीजेपी गठबंधन रणनीति साधते नजर आएगा।
क्या दक्षिण का अभेद किला फतह कर पाएगी एनडीए?
इस सवाल का पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है। हालांकि, एनडीए पूरी ताकत के साथ केरल और तमिलनाडु में अपना प्रभुत्व जमाने को बेताब है। पीएम मोदी द्वारा शंखनाद कर चुनावी संग्राम की शुरुआत करना इस बात की ओर इशारा देता है। केरल की बात करें तो यहां बीजेपी की स्थिति सुधरी है। 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी केरल की त्रिशूर सीट जीतने में कामयाब रही थी। वहीं केरल निकाय चुनाव में भी तिरुवनंतपुरम से लेकर कई निकायों में पार्टी को जीत मिली थी। ये राज्य में बीजेपी का दबदबा बढ़ने का प्रतीक है।
तमिलनाडु की बात करें तो पार्टी यहां 2021 में 20 सीटों पर चुनाव लड़कर 4 जगह जीतने में कामयाब रही थी। तब गठबंधन का नेतृत्व एआईएडीएमके के हाथों में था। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी का जो वोट शेयर 3.6 फीसदी था वो 2024 में बढ़कर 11.24 हो गया था। ये दर्शाता है कि आरएसएस का ग्राउंड लेवल पर काम करना और बीजेपी का रणनीति साधना धीरे-धीरे फलदायी साबित हो रहा है। लोकसभा के बाद अब 2026 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव होंगे जिसमें फिर बीजेपी अपने सहयोगी AIADMK के नेतृत्व में उतरेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि दक्षिण में अपना प्रभुत्व जमाने को बेताब केन्द्र की सत्तारुढ़ दल बदलाव कर पाती है या फिर शिकस्त का सामना करती है।
