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One Nation One Election पर छिड़ा सियासी संग्राम! BJP ने बताया फायदा, तो Congress, RJD, JMM व DMK ने गिना दी खामियां

One Nation One Election: राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए 'वन नेशन वन इलेक्शन' के रूप में एक नया मुद्दा सामने आ चुका है। इसे पढ़ने, समझने के लिए तैयारियां भी शुरू हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: दिसम्बर 12, 2024 6:57 अपराह्न

One Nation One Election
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One Nation One Election: राजनीति में दिलचस्पी रखने वालों के लिए ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के रूप में एक नया मुद्दा सामने आ चुका है। इसे पढ़ने, समझने के लिए तैयारियां भी शुरू हैं। इसी बीच देश के राजनेता और तमाम राजनीतिक दल One Nation One Election पर अपने-अपने हिस्से का तर्क पेश कर रहे हैं। एक ओर केन्द्र की सत्ता में काबिज BJP, एक देश एक चुनाव का फायदा बता रही है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस, RJD, JMM, DMK और TMC समेत अन्य कुछ दल ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की खामियां गिना रहे हैं। कुल जमा बात ये है कि ‘वन नेशन वन इलेक्शन‘ पर सियासी संग्राम छिड़ चुका है। अब देखना ये है कि क्या केन्द्र सरकार इस शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में वन नेशन वन इलेक्शन को लोकसभा में किस समीकरण के साथ पेश करती है।

One Nation One Election पर BJP का तर्क!

भाजपा का तर्क है कि ‘एक देश एक चुनाव’ होने के बाद संसाधनों के साथ कीमती वक्त की बचत होगी। इसके अलावा विकास कार्यों में बांधा नहीं पड़ेगा और एक क्रम में विकास का काम किया जा सकेगा। बीजेपी सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) कहती हैं कि “एक राष्ट्र एक चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हर 6 महीने में चुनाव कराने से सरकारी खजाने को काफी नुकसान होता है। मतदाताओं का प्रतिशत भी हर साल कम हो रहा है और हर कोई इसके पक्ष में है।”

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का कहना है कि “ऐसा होना चाहिए। जैसे ओडिशा में एक साथ चुनाव हुए। जब विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ नहीं होते हैं, तो विकास कार्य रुक जाते हैं। हम एक राष्ट्र एक चुनाव का पूरा समर्थन करते हैं।”

हरियाणा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री अनिल विज कहते हैं कि “यह एक अच्छा फैसला है। इसे आजादी के बाद ही हो जाना चाहिए था, लेकिन पहले की सरकारों ने इसके बारे में नहीं सोचा। पीएम नरेंद्र मोदी अपने साथ कई बदलाव लाए हैं। पीएम मोदी इस देश को ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाना चाहते हैं। हर भारतीय को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।”

‘एक देश एक चुनाव’ को लेकर क्या है Congress का रुख?

देश की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस (Congress), एक देश एक चुनाव को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर नजर आ रही है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी का कहना है कि “वे एक साजिश के तहत जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। कल वे ऐसा करेंगे। एक अध्यादेश निकालें और कहें कि सदन नहीं चल रहा था इसलिए हमें अध्यादेश लाना पड़ा। वे विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दे रहे हैं। वे जो करना चाहते हैं कर रहे हैं क्योंकि उनके पास संख्या बल है।”

राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी का कहना है कि “मसौदा देखने से पहले मैं क्या कह सकता हूं। अगर हमें बिल में कुछ सही नहीं लगता है तो विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा। हम यह तो समझ सकते हैं कि इससे समय की बचत होगी, लेकिन हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इससे जीडीपी में बढ़ोतरी कैसे होगी।”

RJD, JMM व DMK ने भी One Nation One Election के केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने पर दी प्रतिक्रिया!

केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक को मंजूदी दिए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज झा की प्रतिक्रिया आई है। मनोज झा का कहना है कि “आज हमें बताया गया है कि कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है लेकिन हममें से किसी ने भी अंतिम विवरण नहीं देखा है। क्या यह उसी तरह हो रहा है जैसे महिला आरक्षण विधेयक? क्योंकि यह अदिनांकित है। परिसीमन कब होगा? इसके बारे में कोई नहीं जानता, कुछ बुनियादी चिंताएं बाकी हैं। अगर बीच में सरकार गिर गई तो क्या क्या तंत्र होगा? क्या इसे राज्यपाल द्वारा चलाया जाएगा, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधि है? ये ऐसी चिंताएं हैं जो हमें और पूरे भारत को परेशान करती हैं।”

झारखंड के मुख्यमंत्री व JMM नेता हेमंत सोरेन (Hemant Soren) का कहना है कि “उनके पास (BJP) बहुमत है, वे कोई भी निर्णय ले सकते हैं। ये उनका अपना एजेंडा है। वे अपने एजेंडा पर काम करेंगे, हम अपने एजेंडा पर काम करेंगे।”

द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) चीफ व तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा One Nation One Election विधेयक को मंजूरी दिए जाने पर कड़े शब्दो में इसकी आलोचना की है। MK Stalin का कहना है कि “केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव विधेयक’ पेश करने को मंजूरी दे दी है। यह अव्यावहारिक और लोकतंत्र विरोधी कदम क्षेत्रीय आवाज़ों को मिटा देगा, संघवाद को खत्म कर देगा और शासन को बाधित करेगा। आइए हम अपनी पूरी ताकत से भारतीय लोकतंत्र पर इस हमले का विरोध करें।”

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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