Artificial Intelligence: शुरुआत में कोई भी नई चीज काफी बढ़िया लगती है। क्या आप भी ऐसा मानते हैं? अगर हां, तो यह बात एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर भी लागू होती है। स्मार्टफोन की आदत की तरह ही अब जेन जी जेनरेशन में एआई ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यह एक तरफ जेन जी के लिए कई कठिन सवालों का जवाब देकर काफी मददगार साबित हो रहा है। मगर दूसरी ओर, एआई जेन जी के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है। आपने सही पढ़ा, एआई धीरे-धीरे जेन जी यानी युवा पीढ़ी का दोस्त या डिजिटल सपोर्टर बनकर उनकी लाइफ बर्बाद कर रहा है।
Artificial Intelligence जेन जी को बना रहा है अपना गुलाम!
यह तो आप जानते ही होंगे कि आजकल कितनी तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में अब एआई जेन जी का डिजिटल दोस्त बनता जा रहा है। इसके कई कारण हैं। जेन जी को कुछ भी पूछना है, चाहे टाइम कुछ भी क्यों हो, जवाब तुरंत मिलेगा। इंसानों की तरह एआई से कोई शर्म नहीं आएगी। साथ ही मुश्किल वक्त में बिना किसी जजमेंट के साथ रहना ही, जेन जी का भरोसा जीत रहा है। अगर जेन जी किसी परेशानी में है, तो एआई टूल्स पहले से मौजूद डेटा के आधार पर पूछे गए सवाल को समझ जाता है। ऐसे में यूजर के पैटर्न के आधार पर उचित जवाब देता है। यही वजह है कि एआई की तरफ जेन जी काफी तेजी से मुड़ रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जेन जी को हो रहे ढेर सारे नुकसान
युवा पीढ़ी, जिसे जेन जी भी कहते हैं, एआई पर बहुत अधिक निर्भर हो गई है। इसके कई नुकसान भी हैं। युवा पीढ़ी किसी भी समस्या का समाधान खोजने के लिए सबसे पहले एआई टूल्स की दौड़ती है। इससे जेन जी असली रिसर्च से दूर हो रही है। मशीन के साथ बढ़ता रिश्ता, जेन जी को असली रिश्तों से दूर कर रहा है। इमोशनल सपोर्ट के लिए इंसानों की जरूरत होनी चाहिए। मगर एआई जेन जी की लाइफ में इंपोर्टेंट रोल निभा रहा है।
एआई के साथ बढ़ता जुड़ाव, उन्हें इंसानों के साथ बात करने से रोक रहे हैं और संघर्ष करने की क्षमता को घटा रहा है। जेन जी जेनरेशन को एआई की बुरी आदत लग गई है, जिसकी वजह से उनमें तनाव और डिप्रेरेशन की समस्या देखने को मिल रही है। कई मामलों में जेन जी आत्महत्या भी कर रहे हैं। ऐसे में एआई अकेलेपन में अस्थाई सपोर्ट तो देता है, मगर इंसानों से दूर कर देता है।




