Artificial Intelligence: स्मार्टफोन से लेकर आपके आसपास की मशीनों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में कह सकते हैं अब एआई लोगों की जिंदगी का अहम पार्ट बन चुकी है। खासकर जेन जी के लिए एआई का बढ़ता ट्रेंड काफी लाभदायक सिद्ध हो रहा है। आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप कुछ हद तक सही हैं। मगर 100 फीसदी नहीं। जी हां. आपने सही पढ़ा, जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वो जेन जी के डिजिटल भरोसे को कमजोर कर रहा है। आज की युवा पीढ़ी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर क्या असली है और कौन सी चीज नकली है, इसकी सटीक पहचान नहीं कर पा रही है।
Artificial Intelligence जेन जी के लिए पैदा कर रहा है कन्फ्यूजन
कोई भी नई तकनीक फायदे के साथ नुकसान भी पहुंचाती है। यही हाल है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का, एआई की सहायता से मिनटों में किसी भी जानकारी को हासिल किया जा सकता है। मगर इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डीपफेक वीडियो का प्रचार काफी तेजी हो जाता है। हाल ही में ग्रोक एआई प्लेटफॉर्म पर अश्लील एआई जेनरेटिड फोटो की समस्या देखने को मिली। साथ ही नकली वॉयस के जरिए ऑनलाइन ठगी और चैटजीपीटी द्वारा इंसानों जैसे लिखे गए टेक्स्ट इतने ज्यादा हो गए हैं कि जेन जी को असली और नकली में पहचान करना कठिन हो रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए बढ़ रही है असली और नकली की समस्या
सोशल मीडिया पर जेन जी काफी अधिक समय व्यतीत करती है। ऐसे में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जेन जी का भरोसा कम हो रहा है। प्लेटफॉर्म पर प्रभावी लोग नकली फोटो का इस्तेमाल कर रहे है। एआई की मदद से वीडियो एडिटिंग कर रहे हैं। यहां तक की किसी पॉडकास्ट की कहानी भी एआई द्वारा लिखवाई जा रही है। आजकल नकली फॉलोअर्स का ट्रेंड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में सोशल मीडिया पर जानकारी का भंडार इतना अधिक है कि जेन जी को समझ ही नहीं आता कि कौन सा कंटेंट असली है और सा कौन सा नकली है। यही वजह है कि जेन जी को सोशल मीडिया पर मौजूद सभी चीजों पर शक होता है। जबकि कुछ जेन जी सोशल मीडिया की हर जानकारी पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं। ऐसे में युवा पीढ़ी को एक से अधिक सोर्स से वेरिफिकेशन करना चाहिए। एआई का इस्तेमाल करना अनुचित नहीं है, मगर जेन जी को टेक स्मार्ट के साथ ट्रस्ट स्मार्ट भी बनना होगा।
