Artificial Intelligence: क्या अगले 10 सालों में गंभीर बीमारियों को खत्म कर देगा AI? जानिए हेल्थ सेक्टर में क्या हो सकता है इसका भविष्य

Artificial Intelligence: क्या आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अगले एक दशक में गंभीर बीमारियों को समाप्त कर सकता है? साथ ही हेल्थ सेक्टर में एआई कैसे अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

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Artificial Intelligence: अगर आप एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जागरुक है, तो अब तक आप समझ गए होंगे कि इसकी क्या क्षमताएं हैं। ऐसे में एआई सिर्फ एक डिवाइस या तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि हेल्थ समेत कई क्षेत्रों में अपनी पहुंच दे चुका है। ऐसे में एक तरफ जहां लोग इससे खौफ खा रहे हैं और उन्हें अपनी नौकरी जाने का डर है। वहीं, दूसरी तरफ, यह भी दावा किया जा रहा है कि एआई की मदद से कई गंभीर बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। ऐसे में एआई स्वास्थ्य सेक्टर में क्या योगदान दे सकता है?

क्या Artificial Intelligence अगले 10 सालों में खत्म कर देगा गंभीर बीमारियां?

इस सवाल का जवाब हमने चैटजीपीटी से पूछा, तो हमें जवाब मिला, नहीं, अगले 10 सालों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पूरी तरह गंभीर बीमारियों को खत्म नहीं कर पाएगा।लेकिन यह उन्हें काफी हद तक कम, कंट्रोल और बेहतर तरीके से इलाज करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। एआई अगले 10 सालों के दौरान गंभीर बीमारियों जैसे- कैंसर का जल्दी पता लगाने में सक्षम हो सकता है। साथ ही बेहतर इलाज करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, हार्ट और अल्जाइमर बीमारी में इंसानी डॉक्टरों के लिए एक सहायक के तौर पर काम कर सकता है। वही, एमआरआई, सीटी स्कैन, ब्लड रिपोर्ट्स को इंसानों से भी ज्यादा तेजी से एनालिसिस कर सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस हेल्थ सेक्टर में कैसे दे सकता है योगदान

वहीं, अगर हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के भविष्य की बात करें, तो इसकी मदद से कई बीमारियां जल्दी पकड़ में आ सकती हैं। वर्तमान समय में कुछ गंभीर बीमारियां आगे चलकर एआई की वजह से मैनेजेबल या कम गंभीर बन सकती है। साथ ही कई दुर्लभ बीमारियों के ट्रीटमेंट के नए तरीके सामने आ सकते हैं। लेकिन किसी भी गंभीर का पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है, बल्कि भविष्य में नई तकनीक के साथ कुछ नई बीमारियां भी पैदा भी हो सकती हैं।

मालूम हो कि दुनियाभर के कई एआई टूल्स गंभीर बीमारियों के इलाज को तलाश रहे हैं। ऐसे में अगले कुछ सालों के दौरान नई दवाओं की खोज तेज हो सकती है। कई हेल्थकेयर कंपनियां नई मेडिसिन और वैकसीन को जल्दी बनाने में एआई की सहायता ले रही है। वहीं, एआई के जरिए मरीजों को बेहतर पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मिलने की उम्मीद है।

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