Semiconductor in India: दुनिया के कई देश सेमीकंडक्टर मार्केट में भारत से काफी आगे हैं। इसमें अमेरिका, चीन और यूरोप के कुछ देशों के नाम शामिल हैं। चिप के डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और सप्लाई के लिए पूरा इकोसिस्टम चाहिए होता है। ऐसे में फिलहाल भारत इस रेस में पिछड़ रहा है। मगर फिर भी इंडिया का सेमीकंडक्टर बाजार काफी तेजी से प्रगति कर सकता है। इसके लिए भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में नीति आयोग को एक खास योजना मिली है, जिसके जरिए भारत सेमीकंडक्टर मार्केट में ग्लोबल किंग बन सकता है। बजट 2026 से पहले इस खबर को खुशखबरी माना जा रहा है।
Semiconductor in India: भारत कैसे बन सकता है ग्लोबल लीडर
अगर आप नहीं जानते हैं तो आपको बता दें कि बीते साल भारत ने अपनी पहली देसी चिप ‘विक्रम’ को विकसित किया था। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला में देश की देसी चिप को तैयार किया था। जानकारी के मुताबिक, ‘विक्रम’ चिप एक 32 बिट प्रोसेसर है, जिसे इंडिया के रॉकेट मिशन के लिए विकसित किया गया है। नीति आयोग ने इस चिप की अहम जानकारी देते हुए कहा कि इसमें 2डी मटेरियल्स का इस्तेमाल किया गया है। 2डी मटेरियल्स के इस्तेमाल से एनर्जी की बचत होगी, बल्कि कंप्यूटिंग की स्पीड में भी सुधार हो सकता है। मोबाइल की बैटरी की लाइफ अधिक हो सकती है। साथ ही प्रोसेसर जल्दी गर्म नहीं होंगे। यही वजह है कि नीति आयोग का मानना है कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में ग्लोबल लीडर बनने की क्षमता रखता है।
भारत में सेमीकंडक्टर की स्थिति काफी मजबूत, लक्ष्य भी निर्धारित
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चिप में 2डी मटेरियल्स ऐसी सब्सटेंस है, जो बहुत ही पतली होती है। यह मटेरियल्स इतनी पतली होती है कि इन्हें देखना भी मुश्किल है। ऐसे में फोन को कागज की तरह से मोड़ा जा सकता है। मगर वह टूटता नहीं है। 2डी मटेरियल्स, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 3डी मटेरियल्स से बहुत अलग होती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है इन चिप्स का इस्तेमाल मेमोरी चिप्स, क्वांटम डिवाइस कई इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस में किया जा सकता है।
आपको जानकारी के लिए बता दें कि वैश्विक स्तर पर कई चिप कंपनियों के डिजाइन ऑफिस भारत में ही मौजूद हैं। इनमें क्वालकॉम, इंटेल, एएमडी और एनवीडिया का नाम शुमार है। साथ ही वीएलएसआई यानी वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन इंजीनियर की संख्या भारत में 2 लाख से अधिक है। ऐसे में भारत को सेमीकंडक्टर मार्केट में आगे जाने के लिए सिर्फ मशीन लानी है, जबकि चिप का माइंड पहले से ही मौजूद है। इसे भारत की पावर कह सकते हैं। साथ ही भारत के आईटी मंत्री अश्विणी वैष्णव ने टारगेट रखा है कि भारत 2032 तक 3 नैनोमीटर की चिप्स का निर्माण शुरू कर देगा।





