Semiconductor in India: भारतीय संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश होने में एक हफ्ते से भी कम का टाइम रह गया है। आगामी बजट को लेकर देश के हर सेक्टर की अपनी उम्मीदे हैं। ऐसे में चिप निर्माण के सेक्टर में बजट क्या बदलाव ला सकता है? भारत में सेमीकंडक्टर मार्केट काफी तेजी से फल-फूल रही है। हाल ही केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि फरवरी से देश के पहले कमर्शियल चिप प्लांट का काम शुरू होने वाला है। ऐसे में बजट इस सेक्टर को गति प्रदान कर सकता है। साथ ही भारत अपने टारगेट को पाने के लिए कौन सी नीतियां अपना सकता है।
Semiconductor in India: मार्केट को बजट 2026 से उम्मीदें
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत की सेमीकंडक्टर मार्केट ने आगामी बजट में अपनी प्राथमिकताओं को सरकार के सामने रख दिया है। आईईएसए यानी इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन ने सरकार से इंसेंटिव का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, फैब्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए रियायती टैक्स व्यवस्था को बढ़ाने और एक्सपोर्ट इंसेंटिव को सिर्फ वॉल्यूम के बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन से जोड़ने का अनुरोध किया है।
भारत में सेमीकंडक्टर की मौजूदा स्थिति
सेमीकंडक्टर के बाजार में भारत का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। ऐसे में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में दावोस में कहा था, भारत का लक्ष्य 2032 तक दुनिया के टॉप चार सेमीकंडक्टर उप्पादन वाले देशों में शामिल होना है। चार चिप कंपनियां 2026 में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेंगी, जिसमें माइक्रोन, टाटा, केन्स और सीजी सेमी के नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट पहले ही पायलट और ट्रायल फेज से गुजर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर मिशन में देरी और चुनौतियों से लेना होगा सबक
ऐसे में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी आईएसएम के पहले चरण में देरी ने भारत के लक्ष्य को नया आकार दिया है। ऐसे में चिप निर्माण में आने वाली दिक्कतों को पार करने के लिए सिर्फ फाइनेंशियल सहायता ही नहीं, बल्कि एक्सपर्ट्स की भी जरूरत पड़ने वाली है। इसके अलावा, आने वाला बजट यह तय करने में अहम होगा कि क्या आईएसएम सब्सिडी वाले प्रोग्राम से एक लॉन्ग-टर्म इंडस्ट्रियल पॉलिसी में बदल पाएगा, जो भारत में फैब्स, पैकेजिंग यूनिट्स, डिजाइन इकोसिस्टम और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित होगा।
सेमीकंडक्टर मार्केट को वैश्विक स्तर पर लेकर जाने के लिए भारत सरकार को कई चुनौतियों को पार करना होगा। इसमें जमीन, पानी, पावर ग्रिड और लॉजिस्टिक्स, जिनमें से अधिकतर राज्य के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। हालांकि, सेमीकंडक्टर बाजार को गति प्रदान करने के लिए पीएम गतिशक्ति जैसे तरीकों से राज्यों को डेडिकेटेड ढांचा आधारित फंड देने पर विचार कर सकता है।




