Sridhar Vembu: भारत समेत दुनियाभर में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर बहस का दौर चल रहा है। टेक मार्केट के कई दिग्गजों का कहना है कि एआई इंसानों के सहायक के तौर पर काम करेगा। वहीं, कुछ टेक एक्सपर्ट का मानना है कि एआई अगले कुछ सालों में काफी बड़े स्तर पर इंसानों की जगह ले लेगा। ऐसे में लोगों के बीच एआई को लेकर दुविधा बनी हुई है। इस बीच कई कॉरपोरेट्स में कर्मचारियों को अपनी नौकरी जाने का डर सता रहा है। ऐसे में जोहो कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने लोगों को डर से दूर रखते हुए एआई से सुरक्षित रहने वाली 10 नौकरियों की जानकारी दी है।
Sridhar Vembu ने एआई के डर से दूर सेफ जॉब्स की लिस्ट जारी की
टेक मार्केट में अराट्टाई ऐप के जरिए धमाल मचाने वाले श्रीधर वेम्बू ने एआई के दौर में भी 10 ऐसी नौकरियों की जानकारी दी है, जो तगड़ी कमाई के साथ एक सुरक्षित भविष्य निर्धारित कर सकती है। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यानी ट्विटर के जरिए अहम जानकारी साझा की है। एआई के बढ़ते ट्रेंड और क्षमता के बीच उन्होंने 10 सेफ जॉब्स की लिस्ट शेयर की है।
जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने एक्स पर कहा, ‘अगर हमारी सेल्फ-वर्थ की सोच हमारे द्वारा जोड़ी गई इकोनॉमिक वैल्यू से आती है, या अगर यह हमारे इंटेलेक्चुअल दिखावे (*खांसी*) से आती है, तो AI हमारी सेल्फ-वर्थ के लिए एक सीरियस चैलेंज बन सकता है।’
If our notion of self-worth comes from the economic value we add, or if it comes our intellectual pretense (*cough*), AI may pose a serious challenge to our self-worth.
On the other hand no one takes up activities like taking care of children, teaching children, taking care of…
— Sridhar Vembu (@svembu) February 27, 2026
श्रीधर वेम्बू का दावा- इन जॉब्स पर नहीं होगा AI का कोई असर
एआई के डर से दूर 10 सुरक्षित जॉब्स की जानकारी देते हुए श्रीधर वेम्बू ने आगे कहा, ‘दूसरी ओर, कोई भी ऐसे काम नहीं करता जैसे बच्चों की देखभाल करना, बच्चों को पढ़ाना, बुज़ुर्गों की देखभाल करना, अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर खेती में वापस आना, जंगल से प्यार करने के कारण रेंजर के तौर पर जंगल में जाना, लोकल मंदिर के पुजारी जो रोज़ाना के रीति-रिवाज तब भी करते हैं जब मंदिर में कोई नहीं आता, क्लासिकल म्यूजिशियन जो रोज प्रैक्टिस करते हैं और बहुत कम भीड़ के लिए भी परफॉर्म करते हैं। इनमें से कोई भी ऐसा इसलिए नहीं करता, क्योंकि इन कामों से अच्छा पैसा मिलता है। उन पर एआई का कोई असर नहीं होगा। इंसानियत शायद ऐसी एक्टिविटी के लिए खुद को और ऑर्गनाइज कर ले।’
