US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। गौरतलब है कि भारत समेत कई देशों पर असर दिखना शुरू हो गया है। भारत में एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि केंद्र सरकार की तरफ लगातार यह कहा जा रहा है कि गैस या पेट्रोल-डीजल की किसी प्रकार की कमी नहीं है। इसी बीच अब ईरान के विदेश मंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर एक अहम जानकारी दी है।
बताते चले कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जहाजों की एंट्री पर लेकर अहम जानकारी दी है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है, उन लोगों के लिए जो हम पर और सहयोगियों पर हमला कर रहे हैं। बाकी सभी के लिए आवागमन स्वतंत्र है।
US-Israel-Iran-War के बीच विदेश मंत्री ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
ईरानी मंत्री का यह दावा ऐसे समय में आया है जब कई भारतीय जहाजों सहित सैकड़ों जहाज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच के संकरे समुद्री मार्ग में फंसे हुए हैं। बता दें कि बड़ी संख्या में जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते है। लेकिन युद्ध के बीच ईरान ने इसको बंद कर दिया था। वहीं इसे लेकर विदेश मंत्री ने एक अहम जानकारी दी है।
अब्बास अराघची ने कहा कि मार्ग “सुरक्षा चिंताओं” के कारण बंद है।उन्होंने आगे कहा, “निश्चित रूप से, उनमें से कई अपनी सुरक्षा चिंताओं के कारण इस मार्ग से गुजरना पसंद नहीं करते। इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर कई टैंकर और जहाज गुजरते हैं।” होर्मुज जलडमरूमध्य, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री ‘चोकपॉइंट’ है, ओमान और ईरान के बीच स्थित है। अपने सबसे संकरे बिंदु पर इसकी चौड़ाई केवल 33 किलोमीटर है।
इन देशों के लिए बंद है होर्मुज जलडमरूमध्य
ईरान के बयान के अनुसार यह रास्ता मुख्य रूप से इन देशों के जहाज़ों के लिए बंद माना जा रहा है। अमेरिका, इजरायल कुछ रिपोर्टों में अमेरिका के करीबी पश्चिमी सहयोगी देशों के जहाज़ भी शामिल बताए गए हैं। दुनिया के लगभग 20% तेल का ट्रांसपोर्ट इसी रास्ते से होता है। अगर यह पूरी तरह बंद हो जाए तो, तेल और गैस की कीमतें बहुत बढ़ सकती हैं।
कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। यह समुद्री मार्ग ईरान (ईरान) और ओमान (ओमान) के बीच है। यह अरब सागर (अरब सागर) से जुड़ा हुआ है। इसकी चौड़ाई लगभग 33 किमी है और कच्चे तेल के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है।
