US-Israel-Iran War: मध्य पूर्व में तनाव के बीच ईरानी मिसाइलें अमेरिका या इजरायल तक पहुंचने में नाकामयाब हैं। ज्यादातर ईरानी हमले खाड़ी देशों को निशाना बनाकर हो रहे हैं। दुबई, सऊदी, कतर, कुवैत या बहरीन जैसे खाड़ी देशों पर हमला क्या ईरान की चूक है? या ईरानी हमला किसी रणनीति का हिस्सा है?
ऐसे तमाम सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने खाड़ी देशों पर हुए हमलों का कारण स्पष्ट किया है। सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि क्यों उनकी सेना मिडिल ईस्ट में स्थित खाड़ी देशों को निशाना बना रही है।
इजरायल-अमेरिका के बजाय खाड़ी देशों पर ईरानी हमले का कारण क्या?
इसका जवाब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के हवाले से सामने आया है। ईरानी राष्ट्रपति ने पहले खाड़ी देशों से हमले के लिए माफी मांगी है। उनका कहना है कि यदि खाड़ी देशों की धरती का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं किया गया, तो ईरान भी उन पर हमला नहीं करेगा। ये दर्शाता है कि ईरान आखिर क्यों खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है।
ईरानी सेना 27 फरवरी से 8 मार्च तक कुवैत, दुबई, यूएई, ओमान, सऊदी, बहरीन, कतर, जॉर्डन समेत अन्य कुछ खाड़ी देशों पर मिसाइल दाग चुकी है। ईरानी सेना के निशाने पर अमेरिकी एयरबेस हैं जो खाड़ी देशों में स्थित हैं। इसी को निशाना बनाते हुए ईरान अपने प्रतिद्वंदी अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले का जवाब दे रहा है। इस हमले को ईरान की ओर से रणनीति के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है।
तेहरान से मशहद तक जारी इजरायली-अमेरिकी हमला!
इजरायल और अमेरिका संयुक्त रूप से ईरान के विभिन्न हिस्सों में हमला कर रहे हैं। राजधानी तेहरान से लेकर मशहद समेत सभी प्रमुख शहरों पर बमबारी का दौर जारी है। इजरायल जहां प्रमुख रूप से हमले के लिए वायु सेना की मदद ले रहा है। तो वहीं अमेरिका वायु सेना के साथ जल और थल से भी ईरान पर बम के गोले बरसा रहा है। अपुष्ट खबरों की मानें तो इजरायल ने 4 मार्च तक ईरान के अलग-अलग हिस्सों में 600 हवाई हमले किए हैं।
इस दौरान कुल 5000 बम गिराए जाने का दावा है। वहीं अमेरिका की ओर से युद्ध के पहले चार दिनों में 2000 हमले किए जाने का दावा है। इसमें 2000 से अधिक गोले इस्तेमाल किए गए हैं। इजरायल और अमेरिकी हमलों की चपेट में आने से अब तक 1000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हमलों का ये दौर आगे भी जारी रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
