US-Iran Peace Talks: भारत के पड़ोसी मुल्क की राजधानी में हलचल तेज है। सड़कों पर सामान्य से अधिक सुरक्षा नजर आ रही है। ये सबकुछ अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर है। हालांकि, ईरान इससे दूरी बनाता नजर आ रहा है। तेहरान हुकूमत की ओर से ईरानी संसद के स्पीकर गालिबफ ने कहा कि धमकियों के साये में कोई बातचीत स्वीकार नहीं है।
अमेरिका की शर्तों पर ईरान किसी वार्ता का हिस्सा नहीं बनेगा। इतना ही नहीं, ईरानी संसद के स्पीकर ने युद्धक्षेत्र में नए पत्ते उजागर करने की बात कही है। ये दर्शाता है कि कैसे ईरान तुरुप का इक्का फेंकते हुए युद्धक्षेत्र में अपनी दावेदारी मजबूत कर रहा है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की कोशिशें नाकाम साबित होती नजर आ रही हैं।
US-Iran Peace Talks के बीच तेहरान की हुकूमत ने फेंका तुरुप का इक्का!
तेहरान की हुकूमत की ओर से संसद के स्पीकर गालिबफ ने अमेरिका की शर्तों पर बातचीत से सीधा इंकार कर दिया है। इस्लामाबाद में बीते कल अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता प्रस्तावित थी। हालांकि, वार्ता नहीं हुई और पाकिस्तान को निराशा हाथ लगी। इधर बातचीत की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा था कि तब तक ईरानी हुकूमत की ओर से तुरुप का इक्का फेंक दिया गया।
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबफ ने स्पष्ट कर दिया है कि धमकियों के साये में कोई बातचीत स्वीकार नहीं है। इतना ही नहीं, ईरान युद्धक्षेत्र में अपनी मजबूती के लिए नए कार्ड खेलने की बात कर रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अंदरखाने ईरान की सेना युद्ध की तैयारियों पर जोर दे रही है। अंदर ही अंदर नई तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ईरानी तुरुप के इक्के का क्या असर होता है।
ईरान का अडिग रुख देख चिंता में PM शहबाज!
इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता से ईरान लगातार दूरी बनाता नजर आ रहा है। ये ऐसी स्थिति है जो पाकिस्तान को असहज कर रही है। दरअसल, पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर शांति वार्ता की नींव रख रहे हैं। अमेरिका अपनी शर्तों पर ईरान से बातचीत करने को इच्छुक है।
हालांकि, ईरान अडिग रवैया अपनाए हुए धमकियों के साये में कोई बातचीत नहीं करना चाहता है। ये पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के लिए अच्छा संकेत नहीं है। पीएम शहबाज लगातार ईरान से संपर्क साध कर बातचीत को गति देना चाहते हैं। बावजूद इसके ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान कैसे इस चुनौती से पार पाता है।
