Bangladesh News: बांग्लादेश में लोकतंत्र से खिलवाड़! चुनाव से पहले हिंदुओं पर मंडराया हमले का खतरा, अलर्ट के बीच भारत का बड़ा कदम

Bangladesh News: पड़ोसी मुल्क में जारी उठा-पटक के बीच भारत ने ढ़ाका में स्थित भारतीय उच्चायोग में कार्यरत राजनयिकों को अपने परिवार वापस भेजने की सलाह दी है। 12 फरवरी को बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से पूर्व भारत का ये कदम पड़ोसी मुल्क को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

Bangladesh News: पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में उथल-पुथल का दौर जारी है। पाकिस्तान बनने की राह पर अग्रसर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले का खतरा लगातार मंडरा रहा है। 8 से अधिक हिंदू नागरिक महीने भर के भीतर मौत की घाट उतारे जा चुके हैं। इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय मुल्क में जारी घटनाक्रम को लेकर अलर्ट है।

भारत की ओर से बांग्लादेश में रहने वाले डिप्लोमैट्स के लिए एडवाइजरी जारी कर अपने परिवार को तुंरत वापस भेजने की बात कही गई है। ये सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब बांग्लादेश में फरवरी के मध्य में चुनाव होना है। ऐसे में जहां एक ओर चुनावी संग्राम है, वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक हिंदुओं और भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों पर खतरा मंडरा रहा है। इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या कहा जाएगा।

बांग्लादेश में अलर्ट के बीच भारत का बड़ा कदम!

पड़ोसी मुल्क में जारी उठा-पटक के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाया है। ढ़ाका में स्थित भारतीय उच्चायोग में कार्यरत अफसरों के नाम एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें अधिकारियों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिवार को बांग्लादेश से तुंरत भारत वापस भेजना शुरू कर दें। इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ‘खतरे की घंटी’ माना जा रहा है। किसी देश से राजनयिकों को बाहर निकालना उस मुल्क में शांति व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इससे पूर्व भारत अपने प्रतिद्वंदी पाकिस्तान, दक्षिण सूडान, इराक और अफगानिस्तान से भी राजनयिकों के परिजनों को वापस बुला चुका है। ऐसे में जहां एक ओर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू लगातार निशाने पर लिए ज रहे हों। इस समय पर उच्चायोग के अफसरों के नाम जारी संदेश बांग्लादेश की यूनुस सरकार को कई मोर्चे पर घेरता है।

चुनाव से पहले हिंदुओं पर मंडराया हमले का खतरा!

पाकिस्तान बनने की राह पर अग्रसर बांग्लादेश में भी अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। दीपू चंद्र दास, बाजेन्द्र विश्वास, राणा प्रताप बैरागी, खोकोन दास ऐसे नाम हैं जिन्हें चरमपंथी मजहबी पहचान के आधार पर मौत के घाट उतार चुके हैं।

जहां एक ओर मुल्क में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। वहां हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ के समान हैं। क्या ऐसे बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली होगी? मोहम्मद यूनुस क्या ऐसे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे? ये तमाम सवाल हैं जो मुल्क में चुनावी प्रक्रिया के बीच उठ रहे हैं।

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