India-EU Trade Deal: भारत के एक्शन से डोनाल्ड ट्रंप की उड़ी नींद, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होगी सबसे बड़ी डील; जानें सबकुछ

India-EU Trade Deal: भारत-EU ट्रेड डील से वैश्विक राजनीति में हलचल मच गई है। जानिए भारत-यूरोपीय यूनियन की सबसे बड़ी डील की पूरी जानकारी।

India-EU Trade Deal: एक तरफ अमेरिका दुनिया के कई देशों को सीधी धमकी दे रहे है, तो वहीं दूसरी तरफ भारत लगातार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगा हुआ है। वहीं अब खबर सामने आ रही है कि जल्द भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच सबसे बड़ी डील होने जा रही है। इसका इशारा खुद यूरोपीय कमीशन चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिया। मालूम हो कि 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में उर्सुला वॉन डेर शामिल होंगी, वह भारत 25 जनवरी 2026 को पहुंचेगी। अगर भारत और ईयू के बीच एफटीए यानि फ्री ट्रेड डील होता है, तो इससे दोनों देशों को जबरदस्त फायदा मिलने की उम्मीद है। साथ ही दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह भारत के लिए और आसान हो जाएगी।

भारत के एक्शन से डोनाल्ड ट्रंप की उड़ी नींद – India-EU Trade Deal

बता दें कि यूरोपीय कमीशन की चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) कहा कि “मैं भारत जा रही हूं। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक समझौते की दहलीज पर हैं। यह डील यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील देश भारत के साथ व्यापार करने का फर्स्ट-मूवर एडवांटेज (पहला बड़ा मौका) देगी”। मालूम हो कि इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। गौरतलब है कि ट्रंप टैरिफ वॉर के बीच भारत दूसरे देशों के साथ एफटीए करने में लगी हुई है, ताकि भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिल सके।

क्या भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच होने जा रही है सबसे बड़ी डील?

जानकारी के मुताबिक 25 जनवरी 2025 को उर्सुला वॉन डेर भारत पहुंचेंगी। माना जा रहा है कि 27 जनवरी को भारत-ईयू समिट में इस समझौते के पूरा होने की घोषणा की जा सकती है। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 200 करोड़ लोगों के लिए नया बाजार बनाएगा। सबसे खास बात है कि इससे भारत की अर्थ्यवस्था को बूस्ट मिलेगा। एफटीए का मतलब फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समझौता होता है, ताकि दो देश आपस में आसानी से बिजनेस करने के लिए इस्तेमाल करते है। वहीं दूसरी तरफ इससे डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका लग सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि ट्रंप अपने ही जाल में फंसते हुए नजर आ रहे है।

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