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Iran US War: तबाही के कगार पर खड़ा ईरान? अली खामेनेई के खिलाफ चौतरफा हमले को तैयार अमेरिका! क्या मचेगी तबाही?

Iran US War

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Iran US War: मध्य पूर्व में नए सिरे से तनाव का दौर जारी है। तेहरान में मुल्ला शासन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अमेरिका-ईरान आमने-सामने हैं। इस बीच लगातार ईरान और अमेरिका में युद्ध की आशंका व्यक्त की जा रही है। हाल के दिनों में इसको लेकर संशय का दौर बढ़ा है। तीखी बयानबाजी, ईरानी नौसेना का युद्धाभ्यास और अमेरिका वायुसेना का ईरान को चौतरफा घेरना।

उपरोक्त सारे बदलते समीकरण ईरान-यूएस वॉर के संकेत दे रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए हमले को तैयार है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या मिडिल ईस्ट में फिर तबाही मचेगी? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के साथ हालिया घटनाक्रम पर चर्चा करते हैं।

ईरान के खिलाफ चौतरफा हमले को तैयार अमेरिका!

खबरों की मानें तो अमेरिका द्वारा ईरान की चौतरफा घेराबंदी की जा चुकी है। 500 से अधिक फाइटर जेट ईरान की निगरानी कर रहे हैं। प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप न्यूक्लियर वार्ता को लेकर ईरान पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि, ईरानी हुकूमत अमेरिका की बातों को नजरअंदाज कर रही है। अली खामेनेई का साफ कहना है कि दबाव में कोई बातचीत नहीं होगी।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। यही वजह है कि 500 से अधिक फाइटर जेट हवा में ईरान की चौतरफा घेराबंदी किए हुए हैं। इससे इतर अमेरिकी नौसेना का एक बेड़ा भी मिडिल ईस्ट में डेरा जमाए हुए है। अमेरिकी सेना की तैयारी पूरी है। इंतजार है तो बस प्रेसिडेंट ट्रंप के ऑर्डर का फिर मिडिल ईस्ट में जंग का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

तबाही के कगार पर खड़ा ईरान!

इस दावे में बल ईरान की ताजा हालात लाती हैं। दरअसल, ईरान कई मोर्चे पर विफल नजर आ रहे है। सबसे पहले मुल्क के भीतर बेतहाशा महंगाई और चौपट अर्थव्यवस्था मुल्ला शासन की बर्बादी का संकेत दे रही है। इससे इतर ईरान में अंदरखाने अली खामेनेई के खिलाफ असंतोष देखने को मिला है। तेहरान की सड़कों पर उमड़ी जेन-जी व अन्य वर्ग ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अपने शासक पर रत्ती भर विश्वास नहीं है।

माना जा रहा है कि 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद मुल्ला शासन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। आलम ये है कि अली खामेनेई भी बंकर में छिपे हैं और लोगों से संवाद तक नहीं कर पा रहे हैं। वैश्विक मंच पर भी ईरान के मददगारों की संख्या कम हो गई है। ये सारे समीकरण दर्शाते हैं कि किस कदर मुल्क बर्बादी की कगार पर खड़ा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका इस नाजुक दौर में क्या कदम उठाता है।

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