America-Iran War: दुनिया की नजरें ईरान पर टिकीं हैं जहां अमेरिका और इजरायल संयुक्त रूप से मुल्क के प्रतिद्वंदी के रूप में खड़े हैं। विशेषज्ञों की अपनी-अपनी राय है जो अमेरिका-ईरान वॉर से जुड़ी है। इसी बीच एक और आशंका व्यक्त करते हुए पर्दे के पीछे चीन की भूमिका पर प्रकाश डालने की कोशिश हुई है। दावा किया जा रहा है कि चीन अमेरिका-ईरान वॉर के बीच अंदरखाने बड़ा खेल रच रहा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी प्रभुत्व को नुकसान पहुंचाना और वैश्विक मंच पर चीन की साख मजबूत करना है। आइए आपको पूरे प्रकरण की जानकारी देते हैं।
क्या America-Iran War के बीच पर्दे के पीछे खेल रच रहा चीन?
इस सवाल का पुख्ता रूप से अभी कुछ जवाब नहीं दिया जा सकता है। पश्चिम एशिया में ईरान पर हुए हमले के बाद अमेरिका-ईरान आमने-सामने हैं। तेहरान समेत ईरान के सभी प्रमुख शहरों में इजरायल-अमेरिका संयुक्त रूप से बमबारी कर रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप ये युद्ध की विभत्सता नजर आ रही है। हालांकि, पर्दे के पीछे कुछ और चलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। दरअसल, ईरान ने घोषणा की है कि वो कच्चे तेल के बदले अब डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन स्वीकार करेगा। ये सीधे तौर पर अमेरिका अर्थव्यवस्था को करारा चोट देने का कदम है।
दरअसल, इससे पूर्व 1974 में सऊदी अरब की धरती पर हुए समझौता में स्पष्ट हुआ था कि दुनिया भर में कच्चे तेल की खरीद डॉलर के जरिए की जाएगी। इससे अमेरिका को आर्थिक रूप से बल मिला और पूरे विश्व की देश की ख्याति फैली। हालांकि, अब ईरान द्वारा कच्चे तेल के बदले युआन स्वीकारना डॉलर को सीधा चुनौती है। ऐसी स्थिति में चीन की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी। ईरान से कच्चा तेल खरीदने वाले देश अब डॉलर की बजाय युआन एकत्रित करने पर जोर देंगे। इसे पेट्रोडॉलर के प्रभुत्व में गिरावट और पेट्रोयुआन की शुरुआत का उत्प्रेरक कहा जा रहा है।
यदि ऐसा हुआ तो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को करारा चोट पहुंचना तय है। कच्चे तेल की खरीद के लिए दुनिया के तमाम देश अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की खरीदारी करते हैं। हालांकि, अब स्थिति उलट हो सकती है और देश युआन भंडारण पर जोर दे सकते हैं। इससे न सिर्फ अमेरिकी विशेषाधिकार समाप्त होगा, बल्कि ट्रेडिंग डेस्क पर अमेरिका कमजोर होगा और राष्ट्र में महंगाई बढ़ेगी। इन सभी संभावनाओं को देखते हुए चीन द्वारा पर्दे के पीछे बड़ा खेल रचने की बात कही जा रही है।
डॉलर को चोट देने कि बनी योजना से झटका खा गए ट्रंप!
ये नहीं कहा जा सकता है कि दुनिया में डॉलर का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा। लेकिन ये जरूर है कि डॉलर की साख कमजोर करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आसार इस बात के जताए जा रहे हैं कि चीन पर्दे के पीछे से अमेरिका के खिलाफ खेल रच रहा है। सनद रहे कि चीन ईरान से 90 फीसदी कच्चे तेल की खरीदारी करता है। इसके बदले अब तक ईरान को डॉलर के रूप में भुगतान किया जा रहा था। हालांकि, अब नए ऐलान के बाद ईरान कच्चे तेल के बदले युआन स्वीकार करेगा। इससे चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
चीन ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाज़ निकालने के लिए भी सहमत कर लिया है। चीन ईरान को युआन स्वीकार करने के लिए भी सहमत कर चुका है। ये दर्शाता है कि कैसे अमेरिका का प्रतिद्वंदी रहा ड्रैगन धीरे-धीरे ही सही, लेकिन अमेरिकी प्रभुत्व को पूरजोर चुनौती दे रहा है। यही वजह है कि इसे डॉलर को चोट देने के लिए बनाई गई चीनी योजना के रूप में देखा जा रहा है जिससे ट्रंप भी झटका खा गए हैं। इसका दीर्घकालिक असर क्या होगा इसका जवाब तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन ये जरूर है कि चीन ने अमेरिकी साख को कमजोर करने की दिशा में सेंधमारी कर दी है।
