Nepal Flood: विदेशी मदद को लेकर पलटा नेपाल! नहीं संभल सकी तबाही तो बदला फैसला, क्या संकटमोचन बनेगा भारत

Nepal Flood: बाढ़ की वजह से नेपाल ने अपना रुख बदल लिया है लेकिन इस सबके बीच आखिर सरकार ने यू टर्न लेते हुए भारत से मदद की मांग की है। आइए जानते हैं पूरी खबर क्या है और कैसे दरियादिली दिखाकर नेपाल का साथ भारत ने दिया है।

Nepal Flood

Photo Credit- Google Nepal Flood

Nepal Flood: चीन नेपाल सीमा पर अचानक तबाही का मंजर देखने को मिला और हर तरफ चीख पुकार की आवाज सुनाई दी। खौफनाक बाढ़ ने दुनिया भर को स्तब्ध कर दिया और पलक झपकते 626 से ज्यादा जिंदगियां खत्म हो गई है लेकिन इस सब के बीच नेपाल की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया था। जहां उन्होंने विदेशी मदद लेने से साफ इंकार कर दिया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद अब उन्होंने यू टर्न लिया है और भारत चीन से मदद की मांग की है। आइए जानते हैं पूरी खबर क्या है जिसने दुनिया भर को स्तब्ध कर दिया।

Nepal Flood से आफत का माहौल भयावह

दरअसल चीन नेपाल सीमा पर अचानक आई बाढ़ को जहां कुछ लोग चीन की सोची समझी साजिश बता रहे हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ प्राकृतिक तबाही मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 626 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2500 से अधिक लोग घायल हो गए। विदेशी राहत और बचाव टीमों को बुलाने का दबाव बन रहा था जिसके बाद सरकार ने कुछ जरूरी क्षेत्र में बड़ी विशेषज्ञ को आने देने का फैसला लिया।

नेपाल ने मदद लेने के लिए क्या रखी है शर्त

नेपाल के मुताबिक उन्हें केवल उन तकनीकों के लिए विदेशी मदद की जरूरत है जिनकी कमी उनके देश में है लेकिन जमीनी खोज और बचाव कार्य के लिए उन्हें किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं है। नेपाल ने सीमित अंतर्राष्ट्रीय मदद जैसे DNA टेस्ट, फॉरेंसिक जांच और बचाव कार्य लेने का फैसला किया है।

नेपाल को भारत ने क्या भेजा राहत

इस आपदा में कई भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। करीब 320 भारतीय और भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो सका है। भारत की एक टेक्निकल टीम काठमांडू पहुंच चुकी है और भारतीय वायु सेना नेपाल में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। C-130 विमान 10 टन दवाइयां और खाने-पीने का जरूरी सामान लेकर पहुंचा है। मुश्किल समय में भारत चीन को मदद देने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है जो निश्चित तौर पर दरियादिली को दिखाने के लिए काफी है।

 

 

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