Asim Munir: कराची से रावलपिंडी, इस्लामाबाद समेत पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में सियासी पारा चढ़ता नजर आ रहा है। खबरों की मानें तो पीएम शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान की हुकूमत ने इमरान खान की पार्टी पीटीआई के समक्ष एक डील रखी है। इस डील का सीधा नुकसान पाकिस्तानी सीडीएफ आसिम मुनीर को हो सकता है।
दरअसल, शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने पीटीआई नेताओं को लोकतंत्र चार्टर 2006 पर हस्ताक्षर करने की सलाह दी है। क्या पाकिस्तानी हुकूमत का ये कदम आसिम मुनीर को हाशिये पर धकेलने का मास्टर प्लान है? नई डील यानी लोकतंत्र चार्टर 2026 क्या आसिम मुनीर की बेचैनी बढ़ा सकती है? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी।
क्या Asim Munir को हाशिये पर धकेलने का मास्टर प्लान बना रही हुकूमत?
ये जगजाहिर है कि पाकिस्तान में सेना प्रमुख सबसे ताकतवर शख्स होता है। उसकी अनुमति के बिना हुकूमत एक पत्ता तक नहीं हिला पाती। यही वजह है कि पाकिस्तानी सरकार सेना से परेशान भी रहती है। इसी बीच पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह द्वारा इमरान खान की पार्टी पीटीआई को दिया एक प्रस्ताव सामने आया है। सनाउल्लाह ने पीटीआई नेताओं से लोकतंत्र चार्टर 2006 पर हस्ताक्षर करने की बात कही है।
पाकिस्तान की सियासत में दिलचस्पी रखने वाले जानते होंगे कि लोकतंत्र चार्टर 2006 को कैसे सेना पर नियंत्रण लगाने के लिए बनाया गया था। 2006 में नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो ने मिलकर इसे तैयार किया था। इसका सीधा उद्देश्य था सेना को कमजोर करना और सरकार में हस्तक्षेप पर रोक लगाना। चार्टर प्लान में प्रधानमंत्री पद को मजबूत करने और मुल्क में फ्री एंड फेयर चुनाव कराने का प्रस्ताव भी था।
सबको पता है कि यदि ऐसा हो जाए तो आसिम मुनीर की साख मटियामेट हो जाएगी। यदि वर्तमान में पाकिस्तानी हुकूमत और इमरान खान की पीटीआई मिलकर धूल फांक रहे लोकतंत्र चार्टर 2006 पर हस्ताक्षर करें, तो उसके प्रावधान लागू हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री की क्षमता बढ़ेगी जो सीधे तौर पर वर्तमान सीडीएफ आसिम को हाशिए पर धकेलेगी। यही वजह है कि मुल्क में चर्चाओं का दौर जारी है।
लोकतंत्र चार्टर 2006 कैसे बढ़ाएगा आसिम मुनीर की बेचैनी?
वे मुनीर जो पाकिस्तानी हुकूमत को अपनी इशारों पर नचाते हैं। जब और जैसे चाहते हैं, हुकूमत वैसे फैसले लेती है। यदि ऐसे समय में शहबाज शरीफ की हुकूमत और इमरान खान की पार्टी पीटीआई मिलकर लोकतंत्र चार्टर 2006 पर हस्ताक्षर कर दें, तो उनकी बेचैनी बढ़नी तय है। वर्षों से धूल फांक रहे इस चार्टर के प्रभाव में आने के साथ ही सेना पर नकेल कस जाएगी। चार्टर लागू होने के बाद प्रधानमंत्री का कद बढ़ेगा।
शासन स्तर पर कई बदलाव होंगे। इससे पाकिस्तान में लोकतंत्र की नींव मजबूत हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो आज जिस जनता की आवाज गोलियों के बल-बूते दबाई जा रही है, वो उठेगी। हुकूमत से सवाल दागे जाएंगे। ये सारे समीकरण आसिम मुनीर को कमजोर करेंगे। जो आसिम मुनीर मुल्क को जागीर समझ कर राज कर रहे हैं। उनके लिए लोकतंत्र चार्टर 2006 बेचैनी का कारण बन सकता है।
