डील डन या गिरेगा बम! US-Iran-Ceasefire के बीच पाकिस्तान पहुंचा डेलिगेशन, इन पांच चीजों पर फंस सकता है पेंच, जानें सबकुछ

US-Iran ceasefire के बीच पाकिस्तान पहुंचे डेलिगेशन से बढ़ी हलचल। क्या होगी शांति या फिर छिड़ेगा युद्ध? जानें 5 बड़े मुद्दे जिन पर अटक सकती है डील।

US-Iran-Ceasefire

फाइल फोटो

US-Iran-Ceasefire: हाल ही में यूएस और ईरान के बीच हुई सीजाफर के बाद अब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने जा रही है। हालांकि ईरान की तरफ से 10 शर्तें मानने के लिए कहा गया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो शायद सीजफायर टूट जाए। बता दें कि ईरान और अमेरिका का डेलिगेशन अमेरिका-ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता की मजेबानी पाकिस्तान की तरफ से की गई है।

हालांकि इजरयाल अभी भी लेबनान पर दनादन बम बरसा रहा है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। वहीं अगर ईरान की शर्तें देखाई जाए, तो अमेरिका के लिए इन शर्तों को मानना बेहद मुश्किल हो सकता है। आईए समझते वह 5 शर्तें जिनपर पेंच फंस सकता है।

इन पांच चीजों पर फंस सकता है पेंच

बता दें कि ईरान ने सीजफायर और बातचीत करने के लिए 10 शर्तें रखी है। हालांकि कुछ ऐसी शर्तें है, जिसपर पेंच फंस सकता है।

पहला – ईरान की तरफ से लगातार कहा जा रही है कि लेबनान पर हमला रोका जाए। यह उनकी शर्तों में भी शामिल है। हालांकि इजरायल ने साफ कहा कि वह लेबनान पर लगातार हमले करता रहेगा।

दूसरा – इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद, ईरान अब इसे औपचारिक रूप देने पर आमादा है। वह इसे “संप्रभु ईरानी जलक्षेत्र” (Sovereign Iranian Water) कह रहा है। यानि अगर अमेरिका गामी भर देता है तो इसपर पूरा अधिकार ईरान का हो जाएगा।

तीसरा – ईरान का कहना है कि ईरा एक परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) का सदस्य है। इसलिए उसे नागरिक उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार मिलना चाहिए। अगर युद्ध ही परमाणु बम बनाने को लेकर ही शुरू हुआ था।

चौथा – ईरानी सरकार दशकों से कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रही है और अब वह किसी भी समझौते के बदले सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रही है।

डील डन या गिरेंगे बम!

बातचीत से पहले अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे है। उन्होंने साफ कहा कि वह बातचीत के लिए ही जिंदा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज किसी भी कीमत पर खुलकर रहेगा। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है कि क्या 2 हफ्ते के सीजफायर से पहले एक बार फिर बमबारी शुरू हो जाएगी या फिर अमेरिका-ईरान के भीषण जंग शुरू हो जाएगी।

मालूम हो कि युद्ध के बीच कई देशों में एनर्जी संकट गहरा गया था, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की पूर्ति की जाती है। हालांकि अब देखने दिलचस्प होगा कि बातचीत से क्या कोई नतीजा निकलता है या फिर एक बार फिर भीषण युद्ध शुरू हो सकता है।

 

 

Exit mobile version