- US Iran Talks: मिडिल ईस्ट में उठा-पटक का दौर जारी है। अमेरिका और ईरान का आमने-सामने आना वैश्विक समीकरण को प्रभावित कर रहा है। खबर है कि सैन्य तनाव के बीच दोनों मुल्क के अफसरों के बीच आज ओमान की राजधानी मस्कट में शांति वार्ता होनी है। इस दौरान परमाणु वार्ता पर सहमति बन सकती है।
दावा किया जा रहा है कि यदि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी, तो सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का सिंहासन हिल सकता है। कहने का आशय है कि सहमति न बनने की स्थिती में अमेरिका ईरान पर हमले कर सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यूएस-ईरान के बीच वार्ता का हासिल क्या होता है।
सैन्य तनाव के बीच अमेरिका-ईरान की वार्ता पर टिकीं नजरें!
ओमान की राजधानी मस्कट में आज अमेरिका-ईरान के बीच न्यूक्लियर वार्ता होनी है। इस पर दुनिया की नजरें टिकीं हैं। दरअसल, तेहरान में हुए प्रदर्शन के बाद अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों को संरक्षण का आश्वासन दिया था। अली खामेनेई के खिलाफ हुए प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग मारे गए। उसके बाद अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार करने लगा।
अमेरिका के रूख को देख अली खामेनेई की सेना भी मोर्चा संभाल बैठी और ट्रिगर पर ऊंगली होने का दावा किया। इसके बाद दोनों देशों की सेना आमने-सामने नजर आई। यही वजह है कि सैन्य तनाव के बीच मस्कट में होने वाली वार्ता पर दुनिया की नजरें टिकीं है। वार्ता के दौरान क्या कुछ चर्चा होगी इससे जुड़ी जानकारी की प्रतीक्षा है।
सहमति नहीं बनी, तो हिल सकता है अली खामेनेई का सिंहासन!
यदि अमेरिका और ईरान के बीच मस्कट में होने वाली वार्ता के दौरान सहमति नहीं बनी, तो सुप्रीम लीडर खामेनेई का सिंहासन हिल सकता है। अमेरिका ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने की सलाह दी है। ये दर्शाता है कि अमेरिका आगे किन विकल्पों पर विचार कर रहा है।
दोनों देश यदि किसी साकारात्मक रुख पर सहमत नहीं हुए, तो वॉर होना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में अली खामेनेई का सिंहासन डोल सकता है। 1979 के इस्लामिक क्रांति के बाद मुल्ला शासन पहली बार इतनी कमजोर स्थिति में है। यही वजह है कि बातचीत न बनने की स्थिति में ईरानी हुकूमत पर खतरे का बादल मंडराने की बात कही जा रही है।






