US-Iran-Talks: डोनाल्ड ट्रंप के नए दांव से हलचल तेज, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान के लिए रवाना, समझे इसके मायने

US-Iran-Talks: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू होने जा रही है। हालांकि इस बार जेडी बेंस इस बातचीत में हिस्सा नहीं लेंगे।

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फाइल फोटो

US-Iran-Talks: ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर बातचीत का दौर शुरू होने जा रही है। सबसे खास बात है कि दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर के 14 दिन से अधिक हो चुके है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार के हमले की  खबर सामने नहीं आ रही है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार धमकियां सामने आ रही है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान के बातीच के लिए दो खास लोगों को भेजा है। जिसमे ट्रंप के भरोसेमंद दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है। हालांकि इस बार जेडी वेंस इस बार इस डेलिगेशन का हिस्सा नहीं है। माना जा रहा है कि अगर जरूरत पड़ती है, तो वह भी पाकिस्तान जा सकते है।

US-Iran-Talks के बीच डोनाल्ड ट्रंप के नए दांव से हलचल तेज

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐसे कई कदम उठाए हैं, जिन्हें विशेषज्ञ “डबल स्ट्रैटेजी” यानी दबाव और बातचीत का मिश्रण मान रहे हैं। इन कदमों का असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

वहीं अब अमेरिका के दो भरोसेमंद लोग स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान रवाना हो चुके है। बता दें कि पहले चरण की बातचीत पूरी तरह से बेनतीजा निकली थी। वहीं अब देखना होगा कि क्या दूसरे चरण की बातचीत युद्ध रूकवा सकती है या एक बार फिर तबाही मचने जा रही है।

क्या फिर शुरू होगा युद्ध? US-Iran-Talks

बता दें कि एक बार फिर अमेरिका और ईरान का प्रतिनिधमंडल पाकिस्तान में बातचीत का दौर शुरू करेंगे। हालांकि पहले चरण की बातचीत पूर्ण रूप से बेनतीजा निकली थी। कई एक्सपर्ट का मानना है कि हो सकता है कि यह बातचीत भी पूरी तरह से बेनतीजा निकले, क्योंकि ईरान ने जो 10 शर्ते रखी है। अमेरिका उसे किसी भी हालात में नहीं मानेगा। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कह रखा है कि अगर बातचीत से मामला नहीं सुलझता है तो अमेरिका ईरान पर भीषण हमले तो करेगा ही, साथ ही सेना को जमीनी स्तर पर भी उतार देगा।

यानि अगर बातचीत का नतीजा नहीं आता है तो एक बार फिर भीषण युद्ध देखने को मिल सकता है। मालूम हो कि अमेरिका-इजरायल-ईरान के युद्ध से कई देशों की  अर्थव्यवस्था को अच्छा खासा नुकसान हुआ है। वहीं अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या आने वाले दिनों में स्थिति सुधरती है या फिर स्थिति चिंताजनक बनी रहती है।

 

 

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