US-Israel-Iran-War: मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बता दें कि युद्ध के शुरू हुए 20 दिन से भी ज्यादा हो चुके है। इस युद्ध से केवल मीडिल ईस्ट ही नहीं, भारत समेत कई देशों पर गहरा असर देखने को मिला है। वहीं अब कई देशों पर आर्थिक संकट के साथ-साथ एनर्जी संकट भी गरहाने लगा है। भारत में एलपीजी सिलेंडर के दाम पहले ही बढ़ा दिए गए थे। वहीं अब प्रीमियम पेट्रोल में भी बढ़ोतरी हुई है।
माना जा रहा है कि अगर युद्ध कुछ और हफ्ते चलता है तो पेट्रोल और डीजल के दाम और बढ़ सकते है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। इसी बीच अमेरिका ने ईरान को 30 दिनों के लिए तेल बेचने की छूट दी है। जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत को इसका फायदा होगा और क्या ईरान यूएस की बात मानेगा?
अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने को दी छूट
वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि “आज, अमेरिकी वित्त विभाग एक सीमित दायरे वाली, अल्पकालिक अनुमति जारी कर रहा है, जिसके तहत समुद्र में फंसे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी जा रही है। फिलहाल, प्रतिबंधित ईरानी तेल को चीन सस्ते दामों पर जमा कर रहा है।
Iran is the head of the snake for global terrorism, and through President Trump’s Operation Epic Fury, we are winning this critical fight at an even faster pace than anticipated. In response to Iran’s terrorist attacks against global energy infrastructure, the Trump…
— Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) March 20, 2026
दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से उपलब्ध कराकर, संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग 14 करोड़ बैरल तेल को वैश्विक बाजारों में तेजी से पहुंचाएगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा की मात्रा बढ़ेगी और ईरान के कारण आपूर्ति पर पड़ रहे अस्थायी दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। संक्षेप में, हम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को जारी रखते हुए, कीमतों को कम रखने के लिए तेहरान के खिलाफ ईरानी तेल का इस्तेमाल करेंगे”।
अमेरिका के इस छूट से भारत पर क्या पड़ेगा असर?
मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत में भी एनर्जी संकट गहराने लगा है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल के दामों में भी संकट गहराने लगा है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। वहीं अब अमेरिका के इस फैसले के बाद सवाल यह उठ रहा है कि अमेरिका के इस छूट से भारत को फायदा पहुंचेगा। मालूम हो कि भारत के अभी कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए है।
जिसमे कई सौ टन एलपीजी और कच्चे तेल के टैंकर लदे हुए है। अगर ईरान यूएस की बात मानता है तो भारत आना का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि अब देखना होगा कि क्या ईरान अमेरिका की बात मानेगा या फिर वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रहेंगे, ताकि दुनिया भर में दवाब बनाया जा सके।
