US-Israel-Iran War: मिसाइलें भले ही ईरान के अलग-अलग शहरों में गिर रही हैं। लेकिन युद्ध का प्रभाव दुनिया के कई देशों पर है। कुछ देश यूएस-इजरायल-ईरान वॉर में तटस्थ हैं, तो वहीं कुछ अमेरिका-इजरायल या ईरान को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तान इस मामले में बुरा फंसा नजर आ रहा है। पड़ोसी मुल्क के लिए मिडिल ईस्ट में पसरा तनाव गले की फांस बन गया है।
आलम ये है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक-दो नहीं, बल्कि कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ईंधन संकट से लेकर वाशिंगटन की वफादारी साबित करने, ईरान की नजरों में न खटकने जैसी तमाम चुनौतियां पाकिस्तानी हुकूमत के लिए चिंता का सबब बन गई हैं। इसी बीच ईरानी प्रेसिडेंट की धमकी भी सामने आई है। ऐसी स्थिति में पीएम शहबाज लगभग घुटने टेक चुके हैं।
पाकिस्तानी हुकूमत के लिए गले की फांस बना US-Israel-Iran War!
मिडिल ईस्ट में छिड़ा संघर्ष पाकिस्तानी हुकूमत के लिए गले की फांस बन गया है। पड़ोसी मुल्क इस युद्ध के दौर में क्या भूमिका निभाए उसकी समझ से परे है। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है। ईरानी प्रेसिडेंट ने कहा है कि “अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध के लिए जिम्मेदार पक्षों को दंडित करने में फेल रहता है, तो वैश्विक व्यवस्था पूरी तरह खतरे में पड़ सकती है।”
ईरानी राष्ट्रपति ने वैश्विक समुदाय से जारी युद्ध के विनाशकारी परिणामों पर तत्काल ध्यान देने और जिम्मेदारी तय करने का आह्वान भी किया है। उनका कहना है कि यदि ऐसा करने में असफलता मिली, तो दुनिया भीषण तबाही का मंजर देखेगी। ये ऐसी चेतावनी है जो कंगाली की मार झेल रही पाकिस्तानी हुकूमत की धड़कने बढ़ा रही है। यदि स्थिति ऐसी ही रही, तो पीएम शहबाज शरीफ घुटने टेक सरेंडर की स्थिति में आ जाएंगे।
युद्ध के बीच कई चुनौतियों का सामना कर रहा पड़ोसी मुल्क!
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है कंगाली के साथ ईंधन संकट। इससे इतर मुल्क युद्ध के दौरान पक्षपात करे या तटस्थ रहे, ये समझ से परे है। यदि पाकिस्तान ईरान को समर्थन देता है, तो वाशिंगटन से उसके रिश्ते बिगड़ने तय हैं। यदि पाकिस्तान ईरान के खिलाफ जाता है, तो मुल्क में अंदरखाने शिया मुसलमानों का विरोध झेलना पड़ेगा।
सऊदी के साथ हुआ डिफेंस पैक्ट भी पड़ोसी मुल्क के लिए चुनौती बना है। यदि पाकिस्तान गलती से भी ईरान के लिए हमदर्दी व्यक्त कर देगा, तो अमेरिका से उसकी चापलूसी वाला रिश्ता खतरे में आ जाएगा। यही वजह है कि यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच पाकिस्तान के समक्ष कई चुनौतियां होने की बात कही जा रही हैं। ये ऐसी स्थिति है जो शहबाज शरीफ के साथ आसिम मुनीर के लिए गले की फांस बनी है।
