US-Israel-Iran War: दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष पर टिकीं हैं। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। कभी ईरानी हुकूमत से वार्ता, तो कभी सुप्रीम लीडर बनने का प्रस्ताव देने से जुड़ा दावा कर चुके डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर फिर बड़ी टिप्पणी की है। यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच मियामी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ कह दिया।
दुनिया जानती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हर बयान के पीछे उनकी मंशा छिपी होती है। यही वजह है कि अटकलों का दौर शुरू हो चुका है। दूसरी ओर हिजबुल्लाह के बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने भी जंग में एंट्री लेते हुए इजरायल की ओर मिसाइलें दागी हैं। ये युद्ध की विभत्सता को दर्शाता है। पूछा जा रहा है कि क्या मिडिल ईस्ट में और भीषण तबाही मचेगी? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक!
मियामी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रेसिडेंट ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बताया। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे गलती बताते हुए करेक्शन किया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तल्ख रुख अपनाए ट्रंप की ये टिप्पणी कईयों को खटकने लगी है। अमेरिका लगातार ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुई नाकेबंदी को खत्म करने की मांग कर रहा है।
इस बीच ट्रंप का होर्मुज स्ट्रेट को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ बताना कोई रणनीति तो नहीं है? कहीं इसके पीछे अमेरिका कोई कुटनीतिक तैयारी तो नहीं कर रहा है? ऐसे तमाम सवाल हैं जो तेजी से वैश्वक पटल पर उठ रहे हैं। दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े द्वंद पर टिकीं हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर छिड़ी जंग कहां थमती है।
हिजबुल्लाह के साथ हूती विद्रोही भी US-Israel-Iran War में शामिल!
लेबनानी उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह लगातार इजरायल पर हमले कर रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक हिजबुल्लाह की ओर से तैयबेह इलाके में लितानी नदी को पार कर रहे इजरायली सैनिकों पर निशाना साधा गया है। अल-कंतारा में भी दो इजरायली टैंक को हिजबुल्लाह द्वारा निशाना साधने की बात सामने आई है।
हिजबुल्लाह के साथ हूती विद्रोही भी यूएस-इजरायल-ईरान वॉर में शामिल हुए हैं। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से इजरायल की ओर से मिसाइलें दागी गई हैं। हालांकि, इजरायल ने इन हमलों को नाकाम कर दिया है। ये दर्शाता है कि कैसे युद्ध में अन्य शक्तियां भी शामिल हो रही है। ऐसे में यदि युद्धविराम पर बात नहीं बनी, तो आगे और भीषण तबाही मचनी तय है।





