US-Israel-Iran-War: अमेरिका-इजरायल लगातार ईरान पर हमले कर रहा है। इसी बीच ईरान भी लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है। इसके अलावा दुबई समेत कई खाड़ी देशों पर हमला कर रहा है। गौरतलब है कि इस युद्ध से दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ गई है। युद्ध के बीच ईरान की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के ऐलान से वैश्विक तेल बाजार में हलचल है। सबसे खास बात है कि भारत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल आयात इसी रास्ते से होते है। वहीं भारत सरकार की तरफ से बीते दिन जानकारी सामने आई थी कि भारत के पास 25 दिन का स्टॉक है। इसके अलावा विश्लेषकों और उर्वरक उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से भारत में उर्वरक व्यवसाय में उथल-पुथल मची हुई है, क्योंकि शिपिंग लागत में वृद्धि और एक प्रमुख मार्ग के बंद होने से आयात प्रभावित हो रहा है, और गैस की कमी के कारण घरेलू उत्पादन बाधित हो रहा है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
US-Israel-Iran-War के बीच क्या भारत की बढ़ेगी टेंशन
भारत अपनी तेल की ज़रूरत का लगभग 85–90% विदेशों से आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। अगर वहां संघर्ष या ब्लॉकेज होता है तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इससे: पेट्रोल-डीज़ल महंगा होगा, महंगाई बढ़ेगी।घरेलू फसल-पोषक उद्योग एक और बड़े खतरे का सामना कर रहा है – आयातित गैस की कमी, जो उर्वरक संयंत्रों को चलाने के लिए आवश्यक है। कतर ने सोमवार को द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का उत्पादन रोक दिया, क्योंकि ईरान ने इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के जवाब में खाड़ी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखी। भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 50-60% आयात करता है। माना जा रहा है कि ये युद्ध कई मायने में भारत की मुश्किलें बढ़ा सकता है। अगर यह लड़ाई ज्यादा दिन तक चलती है, तो भारत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा नुकसान- US-Israel-Iran-War
तेल के बढ़ते दाम → मध्य पूर्व की स्थिति से तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। पेट्रोल-डीजल, गैस और बिजली के दाम ऊपर जा सकते हैं। परिवहन लागत बढ़ेगी जिससे रोज-मर्रा के सामान महंगे होंगे।
शेयर बाज़ार और निवेश पर नकारात्मक असर- युद्ध की खबरों से निवेशकों के मन में डर बैठा है — भारतीय सेंसेक्स और निफ्टी गिर रहे हैं। विदेशी निवेश (FII) बाहर निकल सकता है जिससे बाज़ार और मजबूती खो सकता है।
जीडीपी विकास पर दबाव – कुछ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और संस्थानों का कहना है कि अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो GDP ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है। वजनदार अनुमान यह है कि तेल की कीमतों के बढ़ने से ग्रोथ में -0.3% से -0.6% तक नुकसान हो सकता है।






