US-Israel-Iran-War: अली खामेनेई की मौत पर भारत क्यों है चुप? इन 4 प्वाइंट्स में समझे पूरी स्थिति; जानें सबकुछ

US-Israel-Iran-War: अमेरिका-इजरायल के साझा हमले से ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है।

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फाइल फोटो

US-Israel-Iran-War: अमेरिका-इजरायल के साझा हमले से ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसी पुष्टि ईरान के सरकारी मीडिया ने की थी। गौरतलब है कि खामेनेई की मौत पर दुनिया के कई देशों ने अपने प्रतिक्रिया दी थी और शोक व्यक्त किया था।  भारत के कई राज्यों में खामेनेई की मौत पर रैलिया निकाली जा रही है। लखनऊ, जम्मू कश्मीर समेत कई राज्यों में भारी भीड़ इकट्ठा हो रही है और खामेनेई की मौत पर अपना  दुख व्यक्त कर रही है। लेकिन एक सवाल जो सबके मन में उठ रहा है कि आखिर सुप्रीम लीडर की मौत पर भारत ने किसी प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी है। आईए इस लेख के माध्यम से आपको बताते है इसके पीछे की असली वजह।

अली खामेनेई की मौत पर भारत क्यों है चुप

कूटनीति रणनीति की बात करें तो भारत के रूख ग्लोबल पैटर्न से मिलता जुलता नजर आ रहा है क्यों जी-7 देशों ने भी खामेनेई की मौत पर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है। जिसके बाद माना जा रहा है कि भारत भी उसी कदम पर चल रहा है। इसके अलावा ईरान और भारत की दोस्ती कभी भी उस मजबूत स्थिति नहीं रहा है।

ईरान ने कई बार पाकिस्तान का दिया साथ

नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे, जो अहम मुद्दों पर सत्तापक्ष की ओर से दलीलें देते रहते हैं,उन्होंने दो दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि 1965 और 1971 दोनों युद्ध में ईरान ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए पैसे हथियार और विमान दिए थे।

आर्टिकल-370 हटने पर जताई थी आपत्ति

2019 में जब मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल -370 हटाने का आदेश दिया था। उस दौरान अली खामेनेई ने इसके खिलाफ बयान दिया था। साथ ही 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान ने एक ट्वीट किया था, जिसमे उसने मुसलमानों का नरसंहार बताया था।

इजरायल भारत को देता है कई जरूरी हथियार

बता दें कि भारत और इजरायल के बीच बहुत पुराना संबंध, ऑपरेशन सिंदूर से लेकर कई मामलों में इजरायल ने भारत का खुलकर साथ दिया है। इसके अलावा भारत  इजरायल से बड़ी मात्रा में हथियार खरीदता है। इसके अलावा हाल ही में पीएम मोदी ने इजरायल का दौरा किया था और कई अहम मुद्दों पर सझौता भी किया था।

यानि अगर आसान भाषा में कहें तो भारत ने खामेनेई की मौत पर इसली कोई प्रतिक्रया नहीं दी है क्योंकि कई मायनों में ईरान हमले खिलाफ काम करता है। हालांकि यह महज एक कयास है, इसके अलावा भी कई अन्य चीजें शामिल हो सकती है।

 

 

 

 

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