US-Israel-Iran War: इजरायल और अमेरिका लगातार ईरान पर बमबारी कर रहा है। हालांकि ईरान की तरफ से भी जबरदस्त पलटवार लगातार जारी है। मालूम हो कि जारी युद्ध के बीच ईरान की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के ऐलान से वैश्विक तेल बाजार में हलचल है। सबसे खास बात है कि भारत का लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल आयात इसी रास्ते से होते है।
जानकारी के मुताबिक क्रूड की कीमत में 13% तक की उछाल आई और यह 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 14 महीनों का उच्चतम स्तर है। जिसके बाद कयासों का बाजार गर्म हो गया है कि क्या भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतों में बदलाव होने जा रहा है। आईए समझते है इसके मायने और भारत पर इसका क्या असर पड़ने वाला है?
US-Israel-Iran War के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल
जारी युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के ऐलान कर दिया है। सबसे खास बात है कि भारत के लगभग 50 प्रतिशत कच्चे तेल आयात इसी रास्ते से होते है। जिसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के दामों में जबरदस्त बदलाव होने जा रहा है। मीडिआ रिपोर्ट्स के मुकाबिक भारतीय रिफाइनरियों के पास 10-15 दिन का कच्चा तेल और 7-10 दिन की ईंधन स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा रणनीतिक भंडार भी उपलब्ध है।
यानि आसान भाषा में समझे तो भारत के पास कुछ दिनों का स्टॉक मौजूद है। लेकिन जिस हिसाब से युद्ध जारी है। माना जा रहा है कि इसमे समय लग सकता है। इसके अलावा भारत भारत के पास अन्य विकल्प भी हो सकते है, जिसमे रूस से तेल खरीदना शामिल है।
कच्चे तेल की कीमत में उछाल पर क्या है भारत के पास विकल्प
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत को थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि भारत का लगभभ 50 प्रतिशत कच्चे तेल आयात इसी रास्ते से होते है। वहीं अगर विकल्प की बात करें तो भारत पहले से ही रूस, मध्य-पूर्व, पश्चिम अफ्रीका समेत कई देशों से तेल आयात करता है जिससे आपूर्ति स्रोत विविध हैं।
अगर एक मार्ग महंगा या अवरुद्ध हो, तो दूसरा विकल्प इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ समय से रूसी कच्चे तेल पर डिस्काउंट मिल रहा है, जिससे भारत की रिफाइनरियों ने कुछ मात्रा में सस्ता तेल हासिल किया है।
ये सौदे भारी वैश्विक कीमतों के दबाव को थोड़ा कम कर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी या GST में बदलाव जैसे कदम उठा सकती है ताकि कीमतों में उपभोक्ता पर असर कम हो। यह समय-समय पर होता रहा है।






