US Waiver on Russian Oil: अपनी नीतियां दरकिनार कर भारत की ‘डिप्लोमेसी’ के आगे झुका अमेरिका! रूस से तेल खरीदने की छूट का कारण चौंका देगा

US Waiver on Russian Oil: दुनिया में तेल सप्लाई बाधित होने की स्थिति में अमेरिका अपनी नीतियों को दरकिनार कर भारत की 'ऑयल डिप्लोमेसी' के समक्ष झुकता नजर आ रहा है। इसी क्रम में आनन-फानन में रूसी तेल खरीदने की छूट जारी की गई है।

US Waiver on Russian Oil

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

US Waiver on Russian Oil: अतीत के पन्ने पलटने पर वो दिन भी याद आते हैं, जब अमेरिका लगातार भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था। डोनाल्ड ट्रंप खुद भारत को रूसी तेल की बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करने की बात कह रहे थे। हालांकि, ईरान पर इजरायली-अमेरिकी हमले के बाद जियो-पॉलिटिकल समीकरण तेजी से बदले हैं।

अमेरिका अब अपनी नीतियों को दरकिनार करते हुए भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ के समक्ष झुका नजर आ रहा है। भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। कैसे मिडिल ईस्ट में बदले समीकरण ने अमेरिका को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, इसके बारे में हम आपको विस्तार से बताएंगे।

अपनी नीतियां दरकिनार कर भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ के आगे झुका अमेरिका!

जो अमेरिका भारत को रूस से कच्चा तेल न खरीदने की नसीहत दे रहा था। अब वही अमेरिका लगातार बयान जारी कर भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट देने की बात कर रहा है। इसके पीछे जियो-पॉलिटिकल के बदलते समीकरण हैं जो अमेरिका को भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ के समक्ष झुकने पर मजबूर करते हैं। अमेरिका समुद्र में फंसे रूसी तेल की खपत चाहता है।

इसी क्रम में भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दी गई है। इससे जहां एक ओर भारत की तेल सप्लाई जारी रहेगी। वहीं दूसरी ओर तेल की खपत से दुनिया भर में बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम काबू में आएंगे। मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुकने के कारण अमेरिका पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि अमेरिका भारत की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ के समक्ष घुटने टेक रहा है।

इजरायल-ईरान वॉर के बीच आसमान छू रहीं कच्चे तेल की कीमतें!

मध्य पूर्व में युद्ध के कारण पसरे तनाव का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। आलम ये है कि जंग के माहौल में कच्चे तेल की कीमतें 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों के बीच होर्मुज की खाड़ी भी बंद हो गई है। ईरान के इस कदम से दुनिया भर में रिफाइनरियों तक तेल की पहुंच प्रभावित है। समुद्र में जहां-तहां रूसी व अन्य देशों के तेल टैंकर फंसे हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका भारत को उन रूसी जहाजों से तेल खरीदने की छूट दी है जो समुद्र में फंसे हैं। अमेरिका को लगता है कि भारत ही दुनिया को इस समस्या से निकाल सकता है। भारत द्वारा रूसी कच्चा तेल खरीदने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई जारी रहेगी। इससे ग्लोबल मार्केट पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहेंगी।

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