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Raksha Bandhan 2023: कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन का पर्व, राखी पर मंडराया भद्रकाल का साया, जानें  शुभ मुहुर्त

Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष इस पावन त्योहार को बहने भाई की कलाई पर राखी बांध कर मनाती है। लेकिन इस बार राखी का त्योहार मनाने के लिए करना पड़ेगा थोड़ा इंतजार। इस साल राखी अगस्त के आखिर में पड़ा है। यहां मिलेगी राखी ...

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By: Arpita Shrivastava

Published: जुलाई 1, 2023 2:18 अपराह्न

Raksha Bandhan
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Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष इस पावन त्योहार को बहने भाई की कलाई पर राखी बांध कर मनाती है। लेकिन इस बार राखी का त्योहार मनाने के लिए करना पड़ेगा थोड़ा इंतजार। इस साल राखी अगस्त के आखिर में पड़ा है। यहां मिलेगी राखी से जुड़ी सभी जानकारी।

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इस साल कब है राखी?

हिन्दू पंजांग के अनुसार, इस वर्ष राखी का त्योहार 30 अगस्त को मनाया जाएगा। बता दें भद्रकाल को अशुभ मुहुर्त माना जाता है। इसलिए भद्रकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके लिए जरुरी है कि आप शुभ मुहुर्त देख कर ही भाई की कलाई पर राखी बांधे।

राखी बांधने का शुभ मुहुर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस साल दुमासा लगने की वजह से सावन का महीना करीब दो महीने का होगा। इसकी वजह से सारे त्योहारों की तारीख आगे बढ़ गई है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के दिन रक्षाबंधन मनाया जाता है।
सावन पुर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:59 बजे से आरंभ होगी। इसके साथ ही भद्रकाल भी आरंभ हो जाएगी। जोकि रात को 9:02 बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार भद्रकाल को अशुभ माना गया है। इसलिए इस साल राखी भद्रकाल बीतने के बाद ही बांधे।

राखी बांधने के लिए दोपहर का वक्त शुभ माना जाता है। यदि दिन में समय भद्रकाल हो तो प्रदोष काल में राखी बांध सकते हैं।
रक्षाबंधन भद्रा पूंछ- शाम 5.30 से शाम 6.31 बजे
रक्षाबंधन भद्रा मुख- शाम 6.31 से रात्रि 8.11 बजे
भद्रा खत्म होने का समय- रात्रि 9.02 बजे
राखी बांधने का शुभ मुहुर्त- रात्रि 9.02 से रात्रि 9.09 बजे है। मतलब इस साल राखी बांधने के लिए सिर्फ 7 मिनट का समय ही शुभ है।

क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन

पौराणिक कथाओं के अनुसार शिशुपाल राजा का वध करते समय, भगवान श्रीकृष्ण के हाथ पर चोट लग गई थी और खून बहने लगा था। जिसको देखते हुए द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनके हाथ पर बांध दिया। जिसके बाद से भगवान श्रीकृष्ण द्रौपदी को अपनी बहन मानने लगे थे। बता दें द्रौपदी के चीरहरण के दौरान श्रीकृष्ण ने अपने भाई होने का फर्ज निभाया था और पूरी सभा में उनकी लाज बचाई थी। इसी वजह से पूरे देश में राखी का त्यौहार मनाया जाने लगा।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल जानकारी के रूप में लें। DNP News Network/Website/Writer इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 

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