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बड़ी खबर! भारत में Electric Vehicle मार्केट में आया जबरदस्त उछाल; वाहन बिक्री में इतने प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी; जानें पूरी डिटेल

Electric Vehicle: यह कहना गलत नहीं होगा की आने वाले सालों में भारत में Electric Vehicle मार्केट में क्रांति आने की उम्मीद है।

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By: Anurag Tripathi

Published: जनवरी 26, 2025 11:54 पूर्वाह्न

Electric Vehicle
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Electric Vehicle: भारत में Electric Vehicle की क्रांति जोर पकड़ रही है। SBI कैपिटल मार्केट्स (SBICAPS) की एक रिपोर्ट के अनुसार, FY30 तक भारत में वार्षिक वाहन बिक्री में EVs का हिस्सा 30-35% तक पहुंच सकता है। हालांकि, इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहन अभी भी सड़कों पर दिखाई देंगे, जो EVs के साथ लंबे समय तक सह-अस्तित्व में रहेंगे। 2019 में 1% से कम ईवी पैठ से बढ़कर 2024 में 7.4% तक पहुंचने के साथ, यह बदलाव उपभोक्ता पसंद और सरकारी नीतियों में बड़े बदलाव को दर्शाता है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव के पीछे क्या कारण हैं।

भारत की Electric Vehicle अपनाने की अनूठी छलांग

भारत का कम वाहन स्वामित्व और नई तकनीकों को तेजी से अपनाना, Electric Vehicle को पहली पसंद बनाने में मदद कर रहा है। जैसे देश ने 3G छोड़कर सीधे 4G को अपनाया, वैसे ही ईवी की बढ़ती लोकप्रियता इसे FY30 तक वार्षिक बिक्री में 30-35% हिस्सेदारी तक ले जा सकती है। ईवी का 50% खर्च बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक ड्राइव यूनिट पर होता है, जो इसे ICE वाहनों से अलग बनाता है। भारत का प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम उन्नत रसायन बैटरी (ACC) के लिए स्थानीय उत्पादन को मजबूत बनाने पर केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, FY30 तक बैटरी की आउटसोर्सिंग 75% से घटकर 50% तक आ जाएगी।

बैटरी क्षमता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश

बढ़ती Electric Vehicle की मांग को पूरा करने के लिए, भारत बैटरी उत्पादन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना बना रहा है। 2030 तक, 500-600 बिलियन रुपये की पूंजी निवेश से 100 GWh ईवी बैटरी क्षमता विकसित होगी। साथ ही, 200 बिलियन रुपये की लागत से 90,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।

Electric Vehicle बिक्री को बढ़ावा देने वाली नीतियां और प्रोत्साहन

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल की वृद्धि 5% जीएसटी, कम रोड टैक्स और FAME व PM E-DRIVE जैसी योजनाओं के तहत सब्सिडी से संभव हो रही है। साथ ही, Scheme to Promote Manufacturing of Electric Passenger Cars in India (SPMEPCI) जैसी योजनाएं उन सेगमेंट पर केंद्रित हैं, जहां ईवी पैठ अभी भी कम है। हालांकि, दोपहिया (2W) और तीनपहिया (3W) वाहन ईवी बिक्री में सबसे आगे हैं, लेकिन निजी कार सेगमेंट में डिजाइन, परफॉर्मेंस और सुरक्षा को लागत से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

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अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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