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CPI Inflation: खुदरा महंगाई दर में जबरदस्त बढ़ोतरी, आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर? चेक करें पूरा कैलकुलेशन

CPI Inflation: सीपीआई को आधार वर्ष 2024 मानते हुए, जनवरी 2026 से जनवरी 2025 के महीने के लिए वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.75% (अस्थायी) है।

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By: Anurag Tripathi

Published: फ़रवरी 12, 2026 6:27 अपराह्न

CPI Inflation
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CPI Inflation: अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) को आधार वर्ष 2024 मानते हुए, जनवरी 2026 से जनवरी 2025 के महीने के लिए वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.75% (अस्थायी) है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित मुद्रास्फीति दरें क्रमशः 2.73% और 2.77% हैं। मालूम हो कि पिछले 8 महीने में यह सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है। सरकार ने अब महंगाई गणना के लिए बेस ईयर यानी आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब महंगाई की तुलना 2024 की कीमतों से की जाएगी। 8 महीने के भीतर यह सबसे ज्यादा बढ़ोतरी है। पहली बार इंडेक्स में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी 40% से नीचे आ गई है अब गैर-खाद्य श्रेणियों जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और मनोरंजन का हिस्सा 60% से अधिक हो गया है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

खुदरा महंगाई दर बढ़कर हुई 2.75% – CPI Inflation

खाद्य मुद्रास्फीति – अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के आधार पर जनवरी 2026 के लिए जनवरी 2025 की तुलना में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 2.13% (अस्थायी) है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित मुद्रास्फीति दरें क्रमशः 1.96% और 2.44% हैं।

आवास मुद्रास्फीति – जनवरी 2026 के लिए वार्षिक आवास मुद्रास्फीति दर 2.05% (अस्थायी) है और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए संबंधित मुद्रास्फीति दरें क्रमशः 2.39% और 1.92% हैं।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला, जिसका आधार वर्ष 2024=100 है, को इसलिए शुरू किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सूचकांक वर्तमान घरेलू उपभोग पैटर्न, मूल्य संरचनाओं और भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप का सटीक प्रतिनिधित्व करता रहे। इससे पहले, जिसका आधार वर्ष 2012=100 था, एक दशक से अधिक समय तक एक स्थिर और विश्वसनीय मापक के रूप में कार्य करता रहा, हालांकि, इस अवधि के दौरान, उपभोग व्यवहार, आय स्तर, शहरीकरण, सेवा क्षेत्र के विस्तार और डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन हुए हैं।

आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?

सरकार ने महंगाई मापने के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए आधार वर्ष 2012 की जगह 2024 कर दिया है। अब कीमतों की तुलना 2024 को आधार मानकर की जाएगी, जिससे आंकड़े मौजूदा बाजार स्थितियों के ज्यादा करीब माने जाएंगे।

इसके साथ ही महंगाई की गणना में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की सूची भी बढ़ा दी गई है। पहले जहां करीब 299 वस्तुएं शामिल थीं, अब उनकी संख्या 350 से अधिक कर दी गई है। नई सूची में पारंपरिक खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ आधुनिक उपभोक्ता सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, पालतू जानवरों का खाना, पर्सनल केयर और फिटनेस से जुड़े उत्पाद भी जोड़े गए हैं।

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अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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