Hydrogen Train: ना बिजली, ना डीजल! हाइड्रोजन गैस से फर्राटा भरेगी रेलगाड़ी, शुरू होगा नया युग, समझे इसके मायने

Hydrogen Train बिना बिजली और डीजल के चलने वाली ये ट्रेन कैसे काम करती है, इसके फायदे क्या हैं और यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

Hydrogen Train

फाइल फोटो

Hydrogen Train: देश के करोड़ों लोग रोजाना ट्रेन में सफर करते है और अपने गंतव्य तक पहुंचते है। बचपन में ट्रेन डीजल से चलती थी, फिर बड़े हुए और आधुनिकता बढ़ी तो लगभग अब ट्रेन बिजली से चलती है। भारत में हाईटैक ट्रेनों का लगातार निर्माण किया जा रहा है। इसी बीच अब एक ऐसी खबर सामने आई है, जिससे रेल प्रेमियों के चेहरे खुशी से खिल उठते है। दरअसल जल्द ही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जिंद से सोनीपत के बीच दौड़ सकती है। जिसका ट्रालय शुरू हो चुका है। करीब 90 किलोमीटर के इस रूट पर लगातार ट्रायल जारी है, और जल्द ही इसका संचालन शुरू हो सकता है। चलिए आपको बताते है कि क्या होते है Hydrogen Train और ये कैसे काम करता है।

जिंद-सोनीपत रूट पर फर्राटा भरेगी Hydrogen Train

हाइड्रोजन ट्रेन एक ऐसी आधुनिक ट्रेन है जो डीजल या पारंपरिक बिजली की बजाय हाइड्रोजन गैस से चलती है। इसमे फ्यूल-सेल टेक्नॉलजी का इस्तेमाल होता है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली पैदा की जाती है। सबसे खास बात है कि इस प्रक्रिया से धुंआ नहीं बनता है, सिर्फ सिर्फ पानी (वॉटर वेपर) बनता है। वहीं पहली ट्रेन जिंद सोनीपत रूट पर चलाया जाएगा, जिसका ट्रायल जारी है। अगर स्पीड की बात करें तो 110 से 140 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है।

ट्रेन का कितना होगा किराया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रेन का किराया 5 रूपये से लेकर 25 रूपये के बीच हो सकता है, हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि इस रूट पर सफल संचालन के बाद इसे अन्य राज्यों में भी शुरू किया जा सकता है। डीजल ट्रेनों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। रेलवे पूरी तरह “ग्रीन और सस्टेनेबल” बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। बता दें कि दुनिया के कई देशों में Hydrogen Train चल रही है। अगर खासियत की बात करें तो इसमे एसी कोच, एलईडी लाइट, मॉर्डन सिटिंग, साथ ही बहुत कम शोर भी होगा।

यह ट्रेन क्यों है खास?

बता दें कि यह ट्रेन पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। ट्रेन से जीरो प्रदूषण निकलेगा। इसके साथ ही डीजल पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले शांत सफर होगा। इसे भविष्य की टेक्नोलॉजी माना जा रहा है कि क्योंकि पहले से ही बहुत सारे देशों में इस ट्रेन का संचालन जारी है। गौरतलब है कि अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो यह ट्रेन कई मायनों में गेमचेंजर साबित हो सकती है।

 

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