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Income Tax News: करदाता ध्यान दें! सैलरी और दूसरे पेमेंट के लिए विभाग ने जारी किया नया फॉर्म, इन बातों को ना करें इग्नोर, जानें सबकुछ

Income Tax News: 1 अप्रैल से इनकम टैक्स कानून में बदलाव हो चुका है। जिसके बाद करदाताओं के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।

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By: Anurag Tripathi

Published: अप्रैल 3, 2026 3:47 अपराह्न | Updated: अप्रैल 3, 2026 4:30 अपराह्न

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Income Tax News: 1 अप्रैल से इनकम टैक्स कानून में बदलाव हो चुका है। जिसके बाद करदाताओं के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। बता दें कि आयकर विभाग द्वारा यह नया कानून इसलिए लाया गया है, ताकि करदाताओं को आईटीआर रिटर्न दाखिल करने में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो। मालूम हो कि पहले कानून में कई तरह के फॉर्म भरने होते थे, वहीं अगर टैक्सपेयर्स द्वारा अगर एक भी गलती कर दी जाती थी, उसका आईटीआर कैंसिल तक हो जाता था। इसी बीच आयकर विभाग ने सैलरी और दूसरे पेमेंट के लिए नया फॉर्म 138 और 140 को लॉन्च किया है। इसकी जानकारी खुद इनकम टैक्स इंडिया ने अपने एक्स हैंडल पर दी है।

क्या है आईटीआर फॉर्म 138

जानकारी के मुताबिक फॉर्म -138 खासकर सैलरी वाले व्यक्तियों के लिए बनाया है। यह फॉर्म सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य सीधी-सादी वित्तीय स्थिति वाले करदाताओं के लिए अनुपालन का बोझ कम करना है।

अगर इसकी विशेषताएं की बात करें तो ये –

  • पेंशनभोगियों और एकल आय स्रोत वाले व्यक्तियों पर लागू।
  • इसमें वेतन, ब्याज और कुछ अन्य स्रोतों से होने वाली आय शामिल है।
    सरल संरचना, जिसमें कम फ़ील्ड भरने होते हैं।
  • त्वरित ई-फाइलिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे त्रुटियां और प्रोसेसिंग समय कम होता है।
  • उन करदाताओं के लिए आदर्श है जिनकी कोई व्यावसायिक या पेशेवर आय नहीं है।

किन करदाताओं के लिए लागू होगा फॉर्म – 138

ये फॉर्म खासकर नौकरीपेशा लोगों के लिए है। वह नौकरीपेशा लोग जिनके पास पूंजीगत लाभ या जटिल निवेश नहीं हैं।
नियमित पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनभोगी। बैंक खातों या सावधि जमा से ब्याज आय अर्जित करने वाले व्यक्ति।

क्या है आईटीआर फॉर्म – 140? Income Tax News

फॉर्म 140 उन व्यक्तियों के लिए है जिनकी आय संबंधी परिस्थितियाँ फॉर्म 138 की तुलना में थोड़ी अधिक जटिल हैं। वहीं अगर इसकी विशेषताएं की बात करें तो –

  • इसका उपयोग उन व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है जिनकी आय के कई स्रोत हैं, जैसे वेतन और ब्याज से प्राप्त आय या छोटी किराये की आय।
  • यह उन करदाताओं के लिए उपयुक्त है जिनकी व्यावसायिक आय नहीं है, लेकिन शेयरों, लाभांश या म्यूचुअल फंड में निवेश है।
  • सरलीकृत अनुभागों से फाइलिंग में तेजी आती है और रिपोर्टिंग में त्रुटियों की संभावना कम हो जाती है।
  • यह बैंकों और नियोक्ताओं से पहले से भरी हुई जानकारी का समर्थन करता है, जिससे सटीकता सुनिश्चित होती है।

 

 

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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