Indian Economy: पिछले कुछ सालों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और तीसरी बनने की राह में तेजी से अग्रसर था, लेकिन अब वित्त मंत्रालय की एक रिपोर्ट ने मोदी सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। मीडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण दुनिया में अस्थिरता बढ़ने लगी है। कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। तो वहीं कई देशों पर एनर्जी संकट गरहराने लगा है, जिसमे भारत भी शामिल है। इसी बीच अब वित्त मंत्रालय ने एक रिपोर्ट पेश की है, जिससे कई तरह के सवाल खड़े होने लगे है कि क्या भारत की अर्थव्यवस्था पर लगाम लगने जा रही है? आईए समझते है इससे मायने –
क्या Indian Economy पर लगेगा ब्रेक?
वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा में शनिवार को कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को निकट भविष्य में अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है। मनी कंट्रोल के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के अपेक्षाकृत मजबूत मैक्रो इकोनॉमिक फंडामेंटल्स और लगातार किए जा रहे नीतिगत प्रयास मजबूती प्रदान करते हैं,
लेकिन बदलती स्थिति के लिए गहन निगरानी और संतुलित नीतिगत प्रतिक्रियाओं की जरूरत है।”रिपोर्ट के अनुसार, एनर्जी डायवर्सिफिकेशन, कृषि क्षेत्र में तैयारी, महंगाई की स्थिति, बाहरी क्षेत्र की मजबूती और नीतिगत उपायों के जरिए सरकार के हस्तक्षेप आर्थिक प्रणाली की क्षमता को मजबूत करते हैं, ताकि वैश्विक घटनाओं से पैदा होने वाले निकट भविष्य के व्यवधानों को सहन किया जा सके।
जीडीपी ग्रोथ पर हो सकता है असर!
रिपोर्ट के मुताबिक अगर मीडिल ईस्ट में युद्ध ज्यादा दिन तक चलता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं। जिससे भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेश में कमी, जैसे असर देखने को मिल रहे हैं। डॉलर के मुकाबले रूपया अपने निचले स्तर पर पहुंच चुका है।
इसके साथ ही शेयर मार्केट में भी गिरावट देखी जा रही है। यह संकेत भारत के लिए बिल्कुल भी अच्छे नहीं है। मिडिल ईस्ट से होकर गुजरने वाले कई अहम समुद्री रास्ते हैं। अगर युद्ध बढ़ता है, तो इन रास्तों पर खतरा बढ़ सकता है, जिससे व्यापार और सप्लाई चेन बाधित हो सकता है।
सरकार के लिए क्या है चुनौतियां
सरकार का सबसे पहला कर्तव्य है महंगाई को रोकना। मालूम हो कि मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को कम कर दिया है। इसके अलावा तेल आयात के विकल्प खोजना, निवेशकों का भरोसा बनाए रखना, गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देना, जैसे कई अन्य गंभीर चुनौतियां है। अब देखना होगा कि भारत सरकार इससे कैसे निपटती है।
