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PM Rahat Scheme: एक्सीडेंट के बाद इलाज के पैसे की चिंता खत्म! इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार करेगी लाखों का भुगतान; जानें योग्ता

PM Rahat Scheme: हर रोज बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटना की खबरें सामने आती है, और इस हादसे में लोगों की मौत हो जाती है।

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By: Anurag Tripathi

Published: फ़रवरी 16, 2026 2:04 अपराह्न

PM Rahat Scheme
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PM Rahat Scheme: हर रोज बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटना की खबरें सामने आती है, और इस हादसे में लोगों की मौत हो जाती है। कई बार सही समय पर चिकित्सा नहीं मिलने के कारण भी लोग सड़क पर या अस्पताल ले जाते समय दम दौड़ देते है।  इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक स्कीम को लॉन्च किया है, जिसके तहत अगर सड़क पर दुर्घटना होती है, तो महज कुछ मिनटों में उसे पास के अस्पताल पहुंचाया जा सके, साथ ही सरकार द्वारा ही इलाज का खर्च उठाया जाएगा। इसके अलावा मामूली चोट में भी 24 और 48 घंटे के लिए  मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। दरअसल केंद्र सरकार पीएम राहत स्कीम को लॉन्च किया गया, ताकि एक्सीडेंट के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचा जा सके और उसकी जान बचाई जा सके।

क्या है PM Rahat Scheme?

योजना के अंतर्गत, किसी भी श्रेणी की सड़क पर हुई दुर्घटना के प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों की अवधि तक प्रति व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा कम घायलों को अधिकतम 24 घंटे तक तथा जीवन के लिए घातक मामलों में अधिकतम 48 घंटे तक स्टेबलाइजेशन उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर पुलिस प्रमाणीकरण के अधीन होगी।

आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुँचाया जाना सुनिश्चित करता है। सड़क दुर्घटना पीड़ित, राह-वीर या दुर्घटना स्थल पर उपस्थित कोई भी व्यक्ति 112 डायल करके निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है और एम्बुलेंस सहायता का अनुरोध कर सकता है। इससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस प्राधिकरणों और अस्पतालों के बीच त्वरित तालमेल संभव हो सकेगा।

पीएम राहत स्कीम की योग्ता

अगर योग्ता की बात करें तो किसी प्रकार के दिशा-निर्देश नहीं दी गए है। अगर कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल हो जाता है और उसको कम चोट आती है, तो उसे अस्पताल में 24 से 48 घंटे के लिए रखा जाएगा। इसके अलावा पुलिस की पुष्टि जरूरी होगी, ताकि इलाज बिना किसी रूकावट के चलता रहे और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सके। यह स्कीम पूर्ण रूप से डिजिटल होगी।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसी भी दुर्घटना पीड़ित का वित्‍तीय अड़चनों के कारण जीवनरक्षक उपचार से वंचित न रहना सुनिश्चित करते हुए सड़क दुर्घटना पीड़ितों का जीवन बचाने तथा भारत की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। कई बार पैसों के कारण घायलों को सरकार अस्पताल में ले जाया जाता है, जिसमे काफी समय लगता है, लेकिन इस स्कीम के बाद घायलों को किसी भी अस्पताल चाहे वह प्राइवेट ही क्यों ना हो वहां भी उपचार हो सकेगा।

 

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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