Abhijeet Dipke की नहीं है कोई खोज-खबर! दिल्ली पुलिस ने क्या किया किडनैप, CJP के साथ नेहा बोरा के आरोप से मचा हड़कंप

Abhijeet Dipke: ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं इस सबके बीच दिल्ली पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया जा रहा है। वहीं हिरासत से छूटने के बाद नेहा बोरा ने इल्जाम लगाए हैं।

Abhijeet Dipke

Photo Credit- Google Abhijeet Dipke

Abhijeet Dipke: दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन किया गया। ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद को लेकर लगातार आक्रोश देखा जा रहा है। वहीं इस सबके बीच पुलिस ने अभिजीत दीपके को बिना नोटिस दिए इस क्षेत्र में प्रदर्शन करने के आरोप में विरासत में ले लिया है। हालांकि इस गिरफ्तारी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी और नेहा बोरा की तरफ से तमाम तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं क्यों सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ है। किस तरह से इस गिरफ्तारी को किडनैप कहा जा रहा है।

अभिजीत पर क्या लगा इल्जाम

रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अभिजीत दीपके को नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई करते हुए 50,000 का बांड और एक वर्ष तक शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष पेश किया जाना है। ऐसे में आगे क्या कार्रवाई होती है उस पर लोगों की नजरें रहने वाली है।

Abhijeet Dipke को लेकर क्यों दिल्ली पुलिस पर साधा गया निशाना

इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने एक पोस्ट किया और कहा कि “अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने किडनैप कर लिया है, उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। हम सब बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं अभिजीत दीपके कहां है।”

महिलाओं के लिए कानून व्यवस्था पर उठा सवाल

वहीं ANI के साथ बात करते हुए AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई बहुत बड़े अपराधी हों – यह चलन इस देश में लंबे समय से चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को दिन हो या शाम, कभी भी हिरासत में ले लिया जाता है, पूरी रात कस्टडी में रखा जाता है और अगली सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। किस अधिकार के तहत यह जायज है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कस्टडी में रखना सही माना जा सकता है? कानूनी तौर पर, लोगों को – खासकर महिलाओं को – सूर्यास्त के बाद छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।”

दिल्ली पुलिस की व्यवस्था पर नेहा बोरा का सवाल

वहीं नेहा बोरा ने आगे कहा कि “एक नया नैरेटिव फैलाया जा रहा है – अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वही जो आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई है? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाएं और SIR रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुरक्षित महसूस कर सकें और उनके वोट देने के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रिपोर्ट में बताया जा रहा है अभिजीत दीपके के अलावा नेहा बोरा को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि उन्हें कुछ घंटे के बाद छोड़ दिया गया। वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि कम से कम 150 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

 

 

 

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