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Vande Mataram: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के विरोध के बीच सदन में गूंजेगी राष्ट्रीय गीत पर चर्चा! कांग्रेस-बीजेपी के तर्क से सियासी गलियारों में हलचल

राष्ट्रीय गीत Vande Mataram पर आज सदन में 10 घंटे की चर्चा शुरू होगी। इसको लेकर कांग्रेस-बीजेपी का अलग-अलग तर्क है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद वंदे मातरम का विरोध कर रहा है जिसके कारण सदन में होने वाली चर्चा पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: दिसम्बर 8, 2025 10:57 पूर्वाह्न

Vande Mataram
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Vande Mataram: शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म है। आलम ये है कि बीजेपी और कांग्रेस के तर्क से हलचल बढ़ गई है। पीएम मोदी दोपहर 12 बजे वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ को मद्देनजर रखते हुए 10 घंटे की चर्चा की शुरुआत करेंगे। ये चर्चा इसलिए भी खास है क्योंकि मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद पहले ही वंदे मातरम की अनिवार्यता का विरोध कर चुका है।

खबर है कि बीजेपी-कांग्रेस अपने-अपने तर्क के सहारे बहस को रफ्तार देंगे। इस चर्चा में लोकसभा में पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल होंगे। इसी क्रम में सबकी निगाहें संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान आज की कार्यवाही पर टिकी हैं।

बीजेपी-कांग्रेस के तर्क के साथ सदन में गूंजेगी Vande Mataram पर चर्चा!

लोकसभा में आज की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं। दरअसल, आज पीएम मोदी लोकसभा में 12 बजे से वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस दौरान सदन में राष्ट्रीय गीत पर होने वाली चर्चा की ध्वनि गूंजेगी। बीजेपी का तर्क है कि वंदे मातरम पर 1937 का फैसला गलत और झुकने वाला कदम था।

वहीं कांग्रेस सत्तारुढ़ दल बीजेपी पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए खुद को राष्ट्रीय गीत को दर्जा देने वाली पहली पार्टी बताते हुए 1937 के फैसले को समावेशिता के लिए जायज बता रही है। इन्हीं तर्कों में भिन्नता के आधार पर आज सदन में गहमा-गहमी का माहौल रहने के आसार हैं।

राष्ट्रीय गीत पर मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के विरोधी सुर!

देश के विभिन्न हिस्सों में वंदे मातरम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा हो रही है। 7 नवंबर, 2025 को राष्ट्रीय गीत की 150वीं बरसी पर मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से विरोध के सुर गूंजे थे। संगठन के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि वंदे मातरम के पहले दो पद ऐतिहासिक रूप से स्वीकार्य हैं, लेकिन बाकी पद इस्लामिक सिद्धांतों से मेल नहीं खाते।

मौलाना मदनी का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के बाकी पदों में माता को देवी दुर्गा के रूप में पुकारा गया है, जिसे इस्लाम स्वीकार नहीं करता। इसी को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश के तमाम हिस्सों में वंदे मातरम की अनिवार्यता पर विरोध कर रहा है। इसी विरोध के बीच सदन में राष्ट्रीय गीत पर होने वाली चर्चा पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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