Anurag Dhanda ने ‘सतलुज’ को पंजाब फाइल्स बताकर बैन को लेकर किया तीखा सवाल, कहा ‘केरल फाइल्स और कश्मीर फाइल्स…’

Anurag Dhanda: सतलुज फिल्म की कंट्रोवर्सी को लेकर आप नेता ने सरकार से सवाल दागा है और सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए क्या कहा। आइए जानते हैं पूरी खबर।

Anurag Dhanda

Photo Credit- Google Anurag Dhanda

Anurag Dhanda: 3 साल पहले दिलजीत दोसांझ की सतलुज ‘पंजाब 95’ के नाम से रिलीज होने वाली थी। तमाम कंट्रोवर्सी के बाद सीबीएफसी की तरफ से उसे सर्टिफिकेट नहीं दिया गया था। ऐसे में रिलीज में देरी हुई और आखिरकार यह ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज की गई और 2 दिन के भीतर ही इसे डिलीट कर दिया गया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर बवाल देखा जा रहा है। दिलजीत दोसांझ की फिल्म को लेकर आप के नेशनल मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी रिएक्ट किया है और तीखा प्रहार करते हुए दिखे हैं।

अनुराग ढांडा ने सरकार से पूछे ये सवाल

अनुराग ढांडा ने x प्लेटफार्म पर कहा कि “फ़िल्म ‘सतलुज’ में पंजाब के युवाओं पर कांग्रेस सरकार में किए गए अत्याचार दिखाए गए थे। पता नहीं क्यों बीजेपी सरकार ने इसे भारत में बैन कर दिया? केरल फ़ाइल्स और कश्मीर फ़ाइल्स दिखाने वाली बीजेपी सरकार पंजाब फ़ाइल्स क्यों नहीं दिखाने दे रही?क्या कांग्रेस से सेटिंग हो गई है अमित शाह जी?”

सतलुज बैन होने के बाद क्या है जी5 की प्रतिक्रिया

अगर अनुराग ढांडा से हटकर अगर जी5 की प्रतिक्रिया की बात करें तो सतलुज को डिलीट होने के बाद उन्होंने कहा कि “रिलीज के बाद से सतलुज को मिली प्रतिक्रिया वाकई अद्भुत रही है। हम उन सभी दर्शकों के तहे दिल से आभारी हैं जिन्होंने फिल्म को सब्सक्राइब किया, देखा और इसका समर्थन किया। आपका प्यार और समर्थन हमारे लिए और इस कहानी को जीवंत बनाने वाले हर व्यक्ति के लिए बहुत मायने रखता है।ज़ी 5 में, हम सतलुज और इसके पीछे की रचनात्मक सोच का दृढ़ता से समर्थन करते हैं। हमारा मानना ​​है कि सशक्त कहानी कहने की कला में प्रेरणा देने, स्थायी प्रभाव छोड़ने और अमिट छाप छोड़ने की क्षमता होती है। हम प्रामाणिक और सार्थक कहानियों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

 

क्या भारत में देखी जाएगी सतलुज

जी5 की तरफ से कहा गया था, “वर्तमान घटनाक्रमों के मद्देनजर, अगली सूचना तक सतलुज फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं होगी। हम फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक पहुंचाने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रचनाकारों के प्रति और दृढ़ विश्वास, कलात्मक अखंडता और उद्देश्य के साथ सुनाई जाने वाली कहानियों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट बनी हुई है।”

वहीं अनुराग ढांडा से हटके अगर सतलुज की कहानी की बात करें तो यह मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है।

 

 

 

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