‘कानून तोड़ेंगे तो खैर नहीं… ‘ क्या अब प्रदर्शन के लिए सड़कों पर नहीं उतर पाएगी CJP, जानिए कोर्ट के साथ बड़ा समझौता

CJP: आशुतोष रांका और सौरभ दास को आखिरकार जमानत मिल गई। उन्हें लिखित हलफनामे पर हस्ताक्षर करने पड़े हैं। आइए जानते हैं आखिर कोर्ट के साथ क्या समझौता हुआ है जो निश्चित तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी के लिए झटके से कम नहीं है।

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Photo Credit- Google CJP

CJP: 10 दिन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहाई मिल गई है। इस सब के बीच सबसे बड़ा ट्विस्ट यह निकला कि दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने एक लिखित हलफनामा दिया है। इस बयान को लिखित रूप में देने के बाद सीजेपी नेताओं को अब प्रदर्शन करने का कोई अधिकार नहीं है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि अब वे शांति से रहेंगे और जंतर मंतर पर प्रदर्शन नहीं करेंगे जब तक नियमों के अनुसार उन्हें अनुमति नहीं दी जाती है। जानते हैं आखिर क्या है पूरा माजरा।

किन शर्तों पर हुई CJP नेताओं की रिहाई

सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल से रिहा भले ही कर दिया गया हो लेकिन उन्हें शांति बनाए रखने और 50000 जमा करने का निर्देश दिया गया है। हलफनामे पर मंजूरी के बाद उनकी रिहाई हो गई है। दरअसल दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को उन्हें हिरासत में लिया था। दरअसल उन पर जंतर मंतर में प्रदर्शन प्रतिबंध होने के बावजूद शांति उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत यह कार्रवाई की थी।

रिहाई के खिलाफ खड़ी पुलिस की जानें दलीलें

14 अक्टूबर को 5 दिन के लिए हिरासत में भेजने के बाद दो दिन और इसे बढ़ा दिया गया था। जिसके बाद अब अदालत की तरफ से उन्हें रिहाई मिली है। पुलिस ने कोर्ट के सामने उनकी न्यायिक हिरासत 3 दिन और बढ़ाने की मांग की थी क्योंकि उन्हें शक था कि उनके बाहर आते ही एक बार फिर प्रदर्शन की हवा बह सकती है। पुलिस का कहना है कि सीजेपी की तरफ से विरोधाभासी बयान दिया जाता है जिससे जनता के मन में सवाल उठते हैं।

अदालत ने दिए सख्त निर्देश

हालांकि अदालत ने बाद में स्पष्ट किया कि अब से कोई भी विरोध प्रदर्शन कानूनी दायरे में होगा और शांति बनाई रखी जाएगी। जब तक की प्रदर्शन करने की अनुमति कानूनी तौर पर नहीं दी जाती है। तब तक सीजेपी की तरफ से कोई भी प्रदर्शन नहीं किया जाएगा।

क्या है सीजेपी की प्रतिक्रिया

हालांकि सीजेपी की तरफ से यह कहा गया है कि किसी भी हलफनामे या कानूनी औपचारिकता की वजह से प्रदर्शन करने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। इस तरह की पाबंदियां अनुचित है। अब ऐसे में किस तरह से सीजेपी अपनी आवाज उठाती है यह देखना दिलचस्प होने वाला है।

 

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