CJP Protest: देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। बीते दिन कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। जिसमे 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ का जुर्माना शामिल है। मालूम हो कि पीएम मोदी की तरफ से हाल ही में एक वीडियो को शेयर किया गया था। जिसमे उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि ऐसे मामले पर कड़े कानून बनाए जाएंगे, साथ ही कड़ी कार्रवाई होगी।
केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने दी अहम जानकारी
पेपर लीक संबंधित प्रस्तावित विधेयक पर केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हम बिल पेश करने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन कैबिनेट के फ़ैसले की जानकारी मिलने के बाद हम आपको समय के बारे में बताएँगे। प्रधानमंत्री ने कहा है कि छात्रों से जुड़े जिस बिल को हम ला रहे हैं, उसमें कोई देरी नहीं होनी चाहिए। देश भी वही चाहता है जो प्रधानमंत्री ने कहा है, इसलिए इसे रोकने के लिए किसी भी तरह की चाल चलना सही नहीं होगा।
#WATCH | Delhi: On the proposed bill on paper leak, Union Minister Kiren Rijiju says, “We are preparing to present the bill, but after you receive the briefing on our cabinet decision, we will inform you about our timing. The Prime Minister has said that there should be no delay… pic.twitter.com/u2PNKI1kqB
— ANI (@ANI) July 24, 2026
अगर कांग्रेस संसदीय कार्यवाही में बाधा डालती रही, तो उसे इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। हम छात्रों के भविष्य के लिए ज़रूरी कदम उठा रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी संसदीय चर्चा को रोकने के लिए हर तरह की बाधाएँ खड़ी करती रही, तो उन्हें इस देश के युवाओं और असल में पूरे देश का गुस्सा झेलना पड़ेगा”।
इन लोगों पर हो सकती है कार्रवाई
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों को प्रभावित किया है। कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे उम्मीदवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य ईमानदार अभ्यर्थियों को न्याय दिलाना और परीक्षा प्रक्रिया में जनता का विश्वास मजबूत करना है।
और जो भी इस घटना में दोषी पाया जाएगा। उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित कानून को लेकर राजनीतिक दलों और शिक्षा विशेषज्ञों की भी नजर बनी हुई है।







