Fuel Shortage: बीते बुधवार और गुरुवार का दिन यूपीवासियों के लिए सामान्य से थोड़ा अलग रहा। इन दो दिनों ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ नजर आई। फ्यूल शॉर्टेज के अफवाहों की आंधी इस कदर चली कि भारी संख्या में लोग पेट्रोल पंप पर उमड़ पड़े।
आंकड़ों में अफवाहों का असर नजर आया और यूपी में ईंधन की बिक्री में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला। हालांकि, अब स्थिति सामान्य हो चुकी है। एलपीजी क्राइसिस की खबरें भी लोगों को परेशान कर रही हैं। इधर केन्द्र ने प्रभावी कदम उठाते हुए कॉमर्शियल एलपीजी का आवंटन कोटा बढ़ा दिया है। इससे उद्योग जगत को राहत मिलने की उम्मीद है।
यूपी में Fuel Shortage की अफवाहों के बीच पेट्रोल-डीजल की बिक्री में भारी बढ़ोतरी
आंकड़ों की मानें तो बीते बुधवार और गुरुवार के दिन यूपी के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में भारी बढ़ोतरी हुई है। फ्यूल शॉर्टेज की अफवाह ने लोगों को इस कदर परेशान किया कि वे बड़ी संख्या में कंटेनर लेकर पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की मानें तो 24 से 26 मार्च के बीच यूपी में ईंधन की बढ़ोतरी 75-77 फीसदी तक बढ़ी।23 मार्च से पहले औसतन यूपी में 1.7 करोड़ लीटर पेट्रोल और 3.1 करोड़ लीटर डीजल की बिक्री होती थी।हालांकि, 24 से 26 मार्च के बीच फ्यूल शॉर्टेज की खबरों का प्रभाव पड़ा और पट्रोल-डीजल की बिक्री में बड़ा इजाफा देखने को मिला।
26 मार्च यानी गुरुवार को यूपी भर में औसतन से 75-77 फीसदी ईंधन की बिक्री दर्ज की गई। गोरखपुर से लेकर देवरिया, प्रतापगढ़, भदोही, श्रावस्ती, कौशांबी, लखनऊ समेत सभी जिलों में ईंधन की जबरदस्त बिक्री देखने को मिली। ये बिक्री फ्यूल शॉर्टेज की अफवाह से बढ़ी थी जो अब सामान्य हो चुकी है।
एलपीजी क्राइसिस की खबरों के बीच बढ़ा कॉमर्शियल आवंटन
ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक एलपीजी क्राइसिस को लेकर छन-छनकर खबरें अभी भी सामने आ रही हैं। हालांकि, सरकार ने एलपीजी की किल्लत को लेकर मचे हो-हल्ला की खबरों को खारिज करते हुए अब स्थिति सामान्य होने की बात कही है। इस बीच केन्द्र ने बड़ा कदम उठाते हुए कॉमर्शियल एलपीजी आपूर्ति की सीमा को 50 से बढ़ाकर 70 फीसदी कर दिया है।
इसमें इस्पात, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, रंग, रसायन और प्लास्टिक सहित श्रम-प्रधान उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति की सुविधा मिलेगी। सरकार के ये कदम दर्शता है कि एलपीजी को लेकर चली आ रही किल्लत अब दूर होने लगी है। घरेलू उपयोग के साथ व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को प्राथमिकता देना इसका पुख्ता प्रमाण है।






