CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में किसानों को केंद्र में रखकर कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित, सम्मान और आर्थिक समृद्धि को प्राथमिकता देते हुए कई योजनाओं और पहलों को आगे बढ़ा रही है। सरकार का दावा है कि खेती को अधिक लाभकारी और किसानों को अधिक सक्षम बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि CM Mohan Yadav की अगुवाई में अन्नदाताओं को जबरदस्त फायदा पहुंच रहा है। इसी बीच मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन ने 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा पार कर लिया है। उपार्जन अभी जारी है। इसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर दी।
CM Mohan Yadav ने दी किसानों को लेकर अहम जानकारी
बता दें कि CM Mohan Yadav ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकार देते हुए लिखा कि “अन्नदाताओं की समृद्धि, मध्यप्रदेश की प्रगति का आधार… मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन ने 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा पार कर लिया है। उपार्जन अभी जारी है। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार किसानों के हित, सम्मान और समृद्धि के लिए निरंतर प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
अन्नदाताओं की समृद्धि,
मध्यप्रदेश की प्रगति का आधार…मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन ने 100 लाख मीट्रिक टन का आंकड़ा पार कर लिया है। उपार्जन अभी जारी है।
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार किसानों के हित, सम्मान और समृद्धि के लिए निरंतर… pic.twitter.com/iX4tg8iPaf
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 24, 2026
किसान कल्याण वर्ष में अन्नदाताओं की समृद्धि का संकल्प हो रहा साकार, 100 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन हुआ। समर्थन मूल्य पर देश में सबसे अधिक 13.10 लाख किसानों से हुआ गेहूं का उपार्जन अभी जारी है। ₹20,680 करोड़ से अधिक का किसानों को भुगतान विगत 10 वर्षों में, इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन हुआ है और अभी जारी है”।
मध्य प्रदेश सरकार का किसानों के हित में फैसला
CM Mohan Yadav ने यह भी संकेत दिया कि किसान केवल उत्पादन करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। इसी सोच के साथ किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और कृषि नवाचार को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इस दिशा में किसानों को जागरूक करने, नई तकनीक अपनाने और बेहतर कृषि प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी बल दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि और किसान-केंद्रित नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों जैसे डेयरी, प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।






